CAPF जनरल एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट 2026 लागू, वीडियो में जाने IPS डेपुटेशन और प्रमोशन को लेकर विवाद; सुप्रीम कोर्ट में हजारों अफसरों की याचिकाएं
केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों से जुड़े नए कानून को लागू कर दिया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 आठ अक्टूबर से प्रभावी हो गया है। इस कानून के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में ग्रुप-A जनरल ड्यूटी और अन्य अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति तथा सेवा नियमों के लिए एक समान ढांचा निर्धारित किया गया है।
यह कानून ऐसे समय लागू हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट में CAPF के हजारों अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इन याचिकाओं में कानून की वैधता और अधिकारियों के करियर पर इसके संभावित प्रभाव को चुनौती दी गई है। विवाद का प्रमुख मुद्दा भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति और CAPF के अपने कैडर अधिकारियों के प्रमोशन के अवसरों से जुड़ा है।
CRPF से SSB तक इन पांच बलों पर लागू होगा कानून
नए कानून का दायरा पांच प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तक है। इनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) शामिल हैं।इन बलों में अधिकारियों की भर्ती, नियुक्ति, पदोन्नति और सेवा शर्तों से संबंधित नियमों को एक समान ढांचे के तहत संचालित करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के जरिए नियुक्ति की व्यवस्था भी कानून के दायरे में आती है।केंद्र सरकार की ओर से इस कानून को लागू किए जाने के बाद अब इन बलों के अधिकारियों की सेवा संबंधी व्यवस्थाएं इसके प्रावधानों के अनुरूप संचालित होंगी। हालांकि, इसके विभिन्न प्रावधानों को लेकर जारी कानूनी विवाद का अंतिम परिणाम सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा।
CAPF अधिकारियों को किस बात की चिंता?
CAPF के कैडर अधिकारियों ने नए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनका कहना है कि IPS अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति के जरिए महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने की व्यवस्था से उनके अपने कैडर में आगे बढ़ने के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।अधिकारियों की दलील है कि वे लंबे समय तक संबंधित बलों में सेवा देते हैं, लेकिन वरिष्ठ पदों पर नियुक्तियों की व्यवस्था के कारण उनके करियर में पदोन्नति की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं। इसी आधार पर उन्होंने कानून की वैधता को चुनौती दी है। अधिकारियों की ओर से एक अवमानना याचिका भी दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है।यह विवाद केवल पदोन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि CAPF के कैडर अधिकारियों के करियर विकास, वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति और सेवा संबंधी समान अवसरों से भी जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट में जारी है कानूनी लड़ाई
नए कानून के लागू होने के बावजूद इसके प्रावधानों को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं के जरिए अधिकारी कानून की वैधता और उसके प्रभाव पर सवाल उठा रहे हैं। अदालत का अंतिम फैसला यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगा कि कानून के प्रावधानों को किस तरह लागू किया जा सकता है और अधिकारियों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाया जाता है। फिलहाल, आठ अक्टूबर से कानून प्रभावी होने के बाद CAPF में भर्ती, प्रतिनियुक्ति और पदोन्नति की व्यवस्था पर इसका असर महत्वपूर्ण रहेगा। इस पूरे मामले में केंद्र सरकार के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर अधिकारियों की नजर बनी हुई है।

