कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष के दौरान प्रीह विहियर मंदिर को हुआ नुकसान, संरक्षण में भारत करता रहा है मदद
प्रीह विहियर, 16 सितंबर (आईएएनएस)। कंबोडिया के 11वीं सदी के प्रीह विहियर मंदिर में 2025 में थाईलैंड के साथ हुई लड़ाई के दौरान हुई भारी तबाही का व्यापक असर अब सामने आया है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस ऐतिहासिक स्थल के परिसर में सैकड़ों स्थानों पर गोलाबारी के निशान मिले हैं। कंबोडिया-थाईलैंड की सीमा पर स्थित इस मंदिर के सरंक्षण और पुनर्निर्माण में भारत लंबे समय से मदद करता रहा है। संघर्ष के दौरान भारत ने यूनेस्को साइट को लेकर चिंता भी जताई थी।
मंदिर में लड़ाई के स्पष्ट निशानों में टूटे हुए बलुआ पत्थर, क्षतिग्रस्त नक्काशी और अस्थिर हुई संरचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा बिना फटे विस्फोटक और आयुध अभी भी संरक्षण कर्मचारियों तथा आगंतुकों के लिए खतरा बने हुए हैं।
क्योडो न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण ने नुकसान का आकलन किया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के सलाहकार पैनल के एक मिशन से मिली तकनीकी जानकारी और सत्यापन के आधार पर प्राचीन मंदिर परिसर में सैकड़ों प्रभावित स्थानों की पहचान की गई है। इससे मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।
कंबोडियाई अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष हुई दो प्रमुख अवधि की लड़ाई के दौरान मंदिर को नुकसान पहुंचा। पहली लड़ाई 24 से 28 जुलाई के बीच हुई, जब भारी गोलाबारी में मंदिर परिसर के 142 स्थान प्रभावित हुए। इसके बाद 7 से 27 दिसंबर के बीच हुई दूसरी लड़ाई और बमबारी में 420 अन्य स्थानों को नुकसान पहुंचा।
प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के महानिदेशक कोंग पुथिकार ने पत्रकारों को बताया कि माइनिंग और तकनीकी टीमों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि 81 मिलीमीटर से 155 मिलीमीटर तक के तोप के गोले और हवाई बम मंदिर के प्रमुख मंडपों तथा मार्गों पर गिरे।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत की मदद से जिन दो हिस्सों में बहाली का काम चल रहा था, वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
पुथिकार के मुताबिक विस्फोटों से प्राचीन बलुआ पत्थर की दीवारें टूट गईं, ऐतिहासिक शिलालेखों के हिस्से अपनी जगह से हट गए और मंदिर की आधार-उत्कीर्ण कलाकृतियों तथा पत्थर की संरचनाओं को नुकसान पहुंचा।
हेरिटेज इमरजेंसी फंड और एएलआईपीएच फंड की मदद से विशेषज्ञों ने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त 23 स्थानों को स्थिर किया है। इसके अलावा टूटे हुए पत्थरों और कलात्मक अवशेषों के 65,738 टुकड़ों का दस्तावेजीकरण और सूचीकरण किया गया है। प्राचीन जल निकासी व्यवस्था को भी बहाल किया गया है।
अधिकारियों ने मंदिर परिसर का व्यापक त्रिआयामी डिजिटल दस्तावेजीकरण भी पूरा किया है। उनका कहना है कि यह रिकॉर्ड भविष्य में संरक्षण और पुनर्निर्माण के काम में मदद करेगा। यह कार्य अंतरराष्ट्रीय सलाहकार मिशन की सिफारिशों के अनुरूप किया गया है।
10 सितंबर को कंबोडिया और अन्य देशों के 40 से अधिक पत्रकारों को मंदिर का दौरा करने की अनुमति दी गई। पिछले साल दिसंबर में हुई दूसरी लड़ाई के बाद किसी मीडिया समूह को पहली बार मंदिर परिसर में जाने की अनुमति मिली थी।
हालांकि, मंदिर अभी पर्यटकों के लिए बंद है। अधिकारियों का कहना है कि परिसर को अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया गया है।
कंबोडियन माइन एक्शन सेंटर के विशेषज्ञों ने पत्रकारों को लड़ाई से प्रभावित इलाकों में ले जाकर उन स्थानों को दिखाया, जहां नुकसान और संघर्ष के अवशेष अभी भी दिखाई दे रहे हैं।
इस बीच, थाईलैंड के ज्वाइंट इंफॉर्मेशन सेंटर ने हाल में आरोप लगाया है कि कंबोडियाई बलों ने प्रीह विहियर मंदिर के आसपास के इलाकों का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया था।
12 सितंबर को जेआईसी के निदेशक प्रापास सोर्नचाईदी ने आरोप लगाया कि थाईलैंड के पास ऐसे सबूत हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कंबोडियाई बलों ने मंदिर के इलाके को सैन्य गढ़ के रूप में इस्तेमाल किया। हालांकि कंबोडिया ने इस आरोप को खारिज किया है।
प्रीह विहियर मंदिर को 2008 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इसे खमेर वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति और असाधारण सार्वभौमिक महत्व वाला स्थल माना गया है। मंदिर परिसर में कई धार्मिक संरचनाएं शामिल हैं, जो करीब 800 मीटर लंबे मार्ग के साथ सीढ़ियों और पक्के रास्तों से जुड़ी हैं।
प्रीह विहियर को लेकर कंबोडिया और सियाम, जिसे अब थाईलैंड कहा जाता है, के बीच विवाद की जड़ें 20वीं सदी की शुरुआत में सीमा निर्धारण तक जाती हैं। यह कानूनी विवाद अंततः अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक पहुंचा, जब कंबोडिया ने 1959 में थाईलैंड के खिलाफ मामला दायर किया।
1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला दिया कि मंदिर उस क्षेत्र में स्थित है जिस पर कंबोडिया की संप्रभुता है। अदालत ने थाईलैंड को मंदिर और कंबोडियाई क्षेत्र में उसके आसपास से अपने सैन्य, पुलिस और अन्य बलों को हटाने का भी आदेश दिया।
2008 में मंदिर को विश्व धरोहर का दर्जा दिए जाने के बाद प्रीह विहियर को लेकर तनाव फिर बढ़ गया। इसके बाद सीमा क्षेत्र में कंबोडियाई और थाई बलों के बीच सशस्त्र झड़पें हुईं, जिनमें मंदिर के आसपास के इलाके भी शामिल थे।
दक्षिण कोरिया के बुसान में जुलाई के अंत में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित सांस्कृतिक विरासत स्थलों की संवेदनशीलता को लेकर चिंता जताई गई। समिति ने संघर्ष के दौरान सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने और उसके विनाश को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।
--आईएएनएस
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