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सीएजी रिपोर्ट ने हेमंत सरकार की विफलताओं की खोली पोल, पूरा राज्य वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार: बाबूलाल मरांडी

सीएजी रिपोर्ट ने हेमंत सरकार की विफलताओं की खोली पोल, पूरा राज्य वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार: बाबूलाल मरांडी
सीएजी रिपोर्ट ने हेमंत सरकार की विफलताओं की खोली पोल, पूरा राज्य वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार: बाबूलाल मरांडी

रांची, 12 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और मनरेगा जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आई कमियां बताती हैं कि सरकार योजनाओं को जमीन पर उतारने में विफल रही है।

मरांडी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन में निविदा प्रक्रिया और कार्यों की गति को लेकर सीएजी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ निविदाओं में प्रतिस्पर्धा बेहद कम रही और एक ऐसे संवेदक को अलग-अलग निविदाओं के जरिए करीब 148 करोड़ रुपए के काम दिए गए, जिसकी निविदा क्षमता नकारात्मक थी।

उन्होंने कहा कि रांची-पूर्वी और खूंटी प्रमंडल की कुछ निविदाओं में केवल दो बोलीदाता शामिल हुए। सीएजी की जांच में दोनों बोलीदाताओं के डिमांड ड्राफ्ट एक-दूसरे द्वारा खरीदे जाने की बात सामने आने का भी उन्होंने दावा किया। मरांडी ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि लक्ष्य और लाभार्थियों को अंतिम रूप देने में हुई देरी के कारण 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख परिवार योजना से बाहर रह गए। मनरेगा को लेकर उन्होंने कहा कि योजना के लिए राशि 40 से 55 दिनों की देरी से जारी की गई, जबकि इसका उद्देश्य जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना है।

उन्होंने दावा किया कि सीएजी को ऐसे खर्च भी मिले, जो योजना के तहत स्वीकार्य नहीं थे। नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2025 तक 1,60,565 करोड़ रुपए के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। वहीं, वर्ष 2024-25 के 1,50,938.84 करोड़ रुपए के बजट में 31,110 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो सके। उन्होंने दावा किया कि 13 केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिली 1,916.63 करोड़ रुपए की राशि में से 596.02 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए जा सके।

मरांडी ने कहा कि सीएजी के निष्कर्ष केवल कुछ योजनाओं की कमियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकार की प्रशासनिक और वित्तीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने सरकार से रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर जवाब देने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

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