मोबाइल किस्त विवाद में हैवानियत: युवक को बंधक बनाकर कराई मजदूरी, जबरन कराया रक्तदान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां मोबाइल की किस्त नहीं चुका पाने पर एक युवक को कथित तौर पर बंधक बनाकर पांच दिन तक मजदूरी कराने और जबरन उसका खून निकलवाने का आरोप लगाया गया है।मामला निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा मजरा पुरहिया गांव का है। पीड़ित की मां ने आरोपियों के खिलाफ निगोहां थाने में शिकायत देने के बाद अब डीसीपी दक्षिणी से इंसाफ की गुहार लगाई है।महिला ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने उनके परिवार को ही धमकाया। हालांकि, डीसीपी साउथ मो. मुश्ताक ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
एक महीने बाद ही बकाया हो गई थी मोबाइल की किस्त
पीड़ित की मां जदूराई के मुताबिक, उनके छोटे बेटे नेवल ने करीब एक साल पहले निगोहां कस्बे की गीता मोबाइल शॉप से जीरो डाउन पेमेंट पर मोबाइल फोन खरीदा था।
शिकायत के अनुसार, मोबाइल खरीदने के करीब एक महीने बाद उसकी किस्त बकाया हो गई। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोग उनके घर पहुंचे और मोबाइल अपने साथ ले गए।
महिला का दावा है कि इसके बाद दो लोग स्कूटी से उनके घर आए और नेवल को किसी बहाने से अपने साथ ले गए।
स्कूटी पर बैठाकर ले जाने का आरोप
जदूराई ने अपनी शिकायत में बताया कि 8 सितंबर की शाम करीब 4 बजे दो लोग स्कूटी से गांव पहुंचे थे।
आरोप है कि दोनों ने नेवल को किसी बहाने से बुलाया और स्कूटी पर बैठाकर अपने साथ ले गए। शिकायत में स्कूटी का नंबर UP32RL8613 भी दर्ज कराया गया है।
जब काफी देर तक नेवल घर वापस नहीं आया तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की।
ब्लड बैंक ले जाकर जबरन खून निकलवाने का आरोप
परिवार के मुताबिक, बाद में नेवल ने उन्हें बताया कि उसे लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया था।
पीड़ित का आरोप है कि वहां कथित तौर पर जबरन उसका खून निकलवाया गया। इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में ले जाया गया, जहां उसे कथित तौर पर बंधक बनाकर मजदूरी कराई गई।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
₹2,799 ऑनलाइन लेने के बाद फिर मांगे ₹12,500
पीड़ित की मां के मुताबिक, नेवल को कथित तौर पर बंधक बनाए जाने के दौरान आरोपियों ने उसके बड़े भाई राजकुमार को फोन किया।
शिकायत के अनुसार, मोबाइल की बकाया किस्त के नाम पर ₹2,799 ऑनलाइन भेजने के लिए कहा गया। परिवार ने 9 सितंबर को दोपहर करीब 2:07 बजे QR कोड के जरिए यह रकम भेज दी।
आरोप है कि पैसे मिलने के बाद भी नेवल को नहीं छोड़ा गया।
इसके बाद 11 सितंबर की शाम करीब 7 बजे परिवार को दोबारा फोन आया और कथित तौर पर ₹12,500 की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रकम नहीं देने पर नेवल को जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पांच दिन बाद थाने पहुंचा युवक
परिवार ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत के मुताबिक, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पांचवें दिन नेवल को रैपिड कैब के जरिए थाने भेजा गया।
परिवार का आरोप है कि कैब का किराया भी उसके भाई से ही भरवाया गया।
परिजनों के मुताबिक, जब नेवल थाने पहुंचा तो उसकी हालत काफी खराब थी और वह बदहवास नजर आ रहा था।
मां ने पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप
नेवल की मां का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय परिवार को ही धमकाया।
महिला का दावा है कि पुलिस ने नेवल को ही मामले में फंसा देने की धमकी दी और बाद में उसे घर भेज दिया।
अब पीड़ित परिवार ने डीसीपी दक्षिणी से मामले में कार्रवाई और इंसाफ की मांग की है।
डीसीपी ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश
डीसीपी साउथ मो. मुश्ताक ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
अब पुलिस की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि युवक को वास्तव में किस परिस्थिति में अपने साथ ले जाया गया, क्या उसे बंधक बनाकर मजदूरी कराई गई, ब्लड बैंक में उसके साथ क्या हुआ और पैसों की मांग किस आधार पर की गई।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। जांच के बाद ही घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

