Samachar Nama
×

ब्रिटिश विदेश मंत्री की चेतावनी, 'होर्मुज बंद होने से खाद्य संकट की ओर बढ़ रही दुनिया'

लंदन, 19 मई (आईएएनएस)। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेत कूपर ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने की वजह से दुनिया “वैश्विक खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है।”
ब्रिटिश विदेश मंत्री की चेतावनी, 'होर्मुज बंद होने से खाद्य संकट की ओर बढ़ रही दुनिया'

लंदन, 19 मई (आईएएनएस)। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेत कूपर ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने की वजह से दुनिया “वैश्विक खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है।”

मंगलवार को ग्लोबल पार्टनरशिप्स कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि खाड़ी देश उर्वरक के बड़े वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं और ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण समुद्री आवागमन बाधित होने से खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी, पहली तिमाही) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगर ईरान संघर्ष इस साल के मध्य तक खत्म नहीं हुआ, तो लगभग 4.5 करोड़ और लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं।

कूपर ने कहा, “दुनिया एक वैश्विक खाद्य संकट की तरफ बढ़ रही है। हम यह जोखिम नहीं उठा सकते कि एक देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को बाधित कर दे और इसकी वजह से करोड़ों लोग भूखे रहने को मजबूर हो जाएं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि होर्मुज को बंद रखने से वैश्विक खाद्य और ईंधन आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। इससे जीवनयापन की लागत भी बढ़ रही है।

ब्रिटेन ने इस जलमार्ग को तुरंत और बिना किसी रोक-टोक के खोलने की मांग दोहराई है। साथ ही “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मल्टीनेशनल मिशन” को आगे बढ़ाने की बात भी कही है, ताकि समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि यह संकट केवल विकासशील देशों को ही नहीं, बल्कि विकसित देशों, निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते वैश्विक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए नई रणनीति की जरूरत महसूस हो रही है।

मार्च 2026 की तिमाही खाद्य सुरक्षा रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया था कि मध्य पूर्व संघर्ष जारी रहा तो हालात बेकाबू हो जाएंगे, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ेगा।

विश्व खाद्य कार्यक्रम का अनुमान है कि यदि यह संघर्ष जारी रहा, तो 2026 के मध्य तक अतिरिक्त 4.5 करोड़ लोग भुखमरी और खाद्य संकट का सामना कर सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने चेतावनी दी कि ऊर्जा कीमतों में झटके और व्यापारिक मार्गों में बाधा आने से आगामी महीनों में खाद्य कीमतों में और तेज बढ़ोतरी हो सकती है।

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी से मार्च 2026 के बीच उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया है। खासकर यूरिया की कीमतों में एक महीने में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और पहले से ही महंगे उत्पादन खर्च हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष और जलवायु संकट अभी भी दुनिया के कई क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा के सबसे बड़े कारण बने हुए हैं।

पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में 8.7 करोड़ से अधिक लोग भूख का सामना कर रहे हैं, जबकि पश्चिमी और मध्य अफ्रीका में 2026 के मध्य तक लगभग 5.2 करोड़ लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझने की आशंका जताई गई थी।

--आईएएनएस

केआर/

Share this story

Tags