ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: नई दिल्ली पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का हुआ स्वागत
नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नई दिल्ली आगमन पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का बुधवार की शाम स्वागत किया गया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पोस्ट में तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने दिल्ली पधारे ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का हार्दिक स्वागत किया गया।
ईरान इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार के ऑफिशियल 'एक्स' अकाउंट से साझा जानकारी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। वे वहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले, जिसकी मेजबानी इस साल के अंत में भारत करने वाला है, इसमें शामिल होने वाले अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
ईरान को उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान वे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य समकक्षों से मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता, बहुपक्षीय सहयोग और आर्थिक लचीलेपन पर चर्चा करेंगे।
अराघची से पहले ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली पहुंचे। उनका स्वागत विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने किया। दोनों के बीच उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तस्वीरें शेयर की गईं। पोस्ट के अनुसार, दोनों के बीच द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रम भी शामिल थे।
भारत-ईरान के रिश्ते आपसी सूझबूझ, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, और रणनीतिक विश्वास पर टिके हैं। काजेम गरीबाबादी ने बुधवार को भारत को 'दोस्त देश' बताते हुए कहा कि तेहरान और नई दिल्ली, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से और ज्यादा भारत से जुड़े जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने पर लगातार काम कर रहे हैं।
उन्होंने नई दिल्ली में चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “भारत हमारे लिए एक दोस्त देश है। हमने अब तक 11 जहाजों को अनुमति दी है। कुछ और जहाजों को अनुमति देने पर भी काम चल रहा है। यह सुविधा किसी और देश को नहीं दी गई है और सभी जहाजों को इजाजत नहीं मिलेगी। हम भारत की मदद का स्वागत करते हैं।”
विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक, अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज से गुजर चुके हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और आगे की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे ईरानी मंत्री ने बताया कि रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम बनाए गए हैं। इनके तहत ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर कुछ शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। यह शुल्क अलग-अलग मानकों के आधार पर तय किया जाएगा।
--आईएएनएस
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