ब्रिक्स विकासशील देशों का मंच, डॉलर पर निर्भरता खत्म कर साझा करेंसी बने : ईशा खान चौधरी
मालदा, 12 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने शाकाहारी-मांसाहारी भोजन के विवाद पर कहा कि क्या खाना है और कब खाना है, यह व्यक्ति का निजी अधिकार है और किसी भी सरकार को इस पर कानून बनाने का हक नहीं है। वहीं ब्रिक्स को लेकर उन्होंने कहा कि यह विकासशील देशों का मंच है और डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए साझा करेंसी पर विचार होना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने कहा, "शाकाहारी खाना है या मांसाहार, कब खाना है और कब नहीं खाना है, यह व्यक्ति का अधिकार है। सरकार को इस पर बोलने का अधिकार नहीं है, क्योंकि सरकार किसी धर्म में नहीं है। सरकार एक राजनीतिक दल की तरह है, जैसे बंगाल में भाजपा की सरकार है और भाजपा एक पार्टी है जो सत्ता और पावर के लिए कोशिश करती है। भाजपा कोई धर्म नहीं है, न हिंदू धर्म है न मुसलमान धर्म, सिर्फ एक पार्टी है। किसी भी पार्टी की सरकार को यह कानून बनाने का अधिकार नहीं है कि कौन क्या खाएगा और क्या नहीं खाएगा।"
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा कहेगी कि विरोध क्यों किया, तो हर पार्टी विरोध कर सकती है। यह हमारा संवैधानिक अधिकार है। यह हमारे संविधान में है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि आम जनता ब्रिक्स के बारे में ज्यादा नहीं जानती है। ब्रिक्स क्या है? ब्रिक्स एक मल्टीनेशनल फोरम है, कई देशों का फोरम है, विकासशील देशों का फोरम है। सभी विकासशील देश हैं, पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं, अमेरिका, स्विट्जरलैंड, जर्मनी या यूरोपीय संघ के देशों की तरह विकसित नहीं हुए हैं। ब्रिक्स में शामिल सभी अर्थव्यवस्था और सरकारें कभी-कभी आपस में सहयोग करने की कोशिश करती हैं। इसका एक बहुत महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिस पर कोशिश हुई थी लेकिन अभी तक वह पूरा नहीं हुआ है और जनता को इसके बारे में पता भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि अभी तक जब हम किसी दूसरे देश के साथ व्यापार करते हैं, तो हम भारतीय रुपये में व्यापार नहीं करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल करते हैं। हर देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार अमेरिकी डॉलर के साथ ही करता है। डॉलर पर जो हमारी निर्भरता है, उसे कम करने के लिए हम अपनी खुद की करेंसी क्यों नहीं बना लेते। भविष्य में अगर ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग होता है, जैसे चीन और भारत के बीच, तो यह विकासशील देशों के लिए अच्छा होगा।
उन्होंने कहा कि अगर ब्रिक्स जैसे मल्टीनेशनल इंटरनेशनल फोरम के जरिए सदस्य देशों के बीच सहयोग हो सकता है तो यह अच्छा होगा, लेकिन इतना सहयोग होगा या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।
उन्होंने पाकिस्तान के ब्रिक्स में शामिल होने की इच्छा और चीन द्वारा उसका समर्थन करने पर पूछे गए सवाल पर कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच पहले से ही बहुत लंबे समय से समस्या चली आ रही है। जब तक यह समस्या दूर नहीं होती, जब तक आतंकवाद नहीं रुकता, तब तक एक साथ मिलकर काम करना मुश्किल होगा।
--आईएएनएस
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