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ब्रिक्स से लेकर भर्ती घोटालों तक, बांसुरी स्वराज का कांग्रेस पर हमला, बोलीं-'मोहब्बत की दुकान' में भ्रष्टाचार का कारोबार

ब्रिक्स से लेकर भर्ती घोटालों तक, बांसुरी स्वराज का कांग्रेस पर हमला, बोलीं-'मोहब्बत की दुकान' में भ्रष्टाचार का कारोबार
ब्रिक्स से लेकर भर्ती घोटालों तक, बांसुरी स्वराज का कांग्रेस पर हमला, बोलीं-'मोहब्बत की दुकान' में भ्रष्टाचार का कारोबार

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने ब्रिक्स और पंजाब मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना की और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सहयोगी के परिसर पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप में हुई छापेमारी के बाद पार्टी की भर्ती प्रणाली पर सवाल उठाए।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सहयोगी के ठिकाने पर हुई छापेमारी पर सांसद बांसुरी स्वराज ने मीडिया से बातचीत में कहा, "ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी की 'मोहब्बत की दुकान' में सिर्फ भ्रष्टाचार का ही कारोबार होता है। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं, एक तरफ तो वह छात्रों की बात करते हैं, लेकिन जब उनकी ही पार्टी के लोग देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, तो क्या उसकी 'गूंज' उन तक नहीं पहुंचती? आप सभी ने हाल ही में देखा कि उत्तराखंड में वीपीडीओ परीक्षा घोटाले के सिलसिले में ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तत्कालीन और मौजूदा पीए के ठिकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान ईडी को उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं ज्यादा संपत्ति और एसेट्स मिले। इससे कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली, खासकर उनकी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते हैं।"

सांसद ने कहा, "छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के पूर्व ओएसडी को भी सीजीपीएससी भर्ती पेपर लीक मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया है। इसी तरह हिमाचल में आउटसोर्सिंग भर्ती में कमीशनखोरी का मामला सामने आया। कांग्रेस के एक नेता के बेटे पर कमीशन लेने का आरोप लगा है। इन मुद्दों पर राहुल गांधी चुप्पी क्यों साध लेते हैं?

ब्रिक्स में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के शामिल नहीं होने पर बांसुरी स्वराज ने कहा, "राजनीति में हमेशा राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब भारत की बात आती है, जब राष्ट्रीय हित की बात आती है तो मन में कोई मतभेद नहीं होना चाहिए। यह बहुत दुखद है कि जब कांग्रेस पार्टी के तीनों मुख्यमंत्रियों को ब्रिक्स समिट के डिनर का निमंत्रण दिया गया तो राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने के बजाय उन्होंने अपनी पार्टी की राजनीति को प्राथमिकता दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने शुरू में डिनर में शामिल होने और निमंत्रण स्वीकार करने पर सहमति जताई थी, हालांकि राजनीतिक मजबूरियों के कारण, ऐसा लगता है कि बाद में उन्होंने सरकार को सूचित किया कि वे इसमें शामिल नहीं होंगे। "

पंजाब में बिजली संकट पर भाजपा सांसद ने कहा, "पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने 24/7 बिजली यानी बिना रुकावट बिजली देने का वादा किया था, लेकिन ऐसा लगता है कि बिजली का यह वादा बिजली कटौती में बदल गया है। उद्योगों को 14 घंटे तक की बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। आम आदमी पार्टी की सरकार को इस स्थिति के बारे में अच्छी तरह पता था। उन्हें पता था कि धान का मौसम आने वाला है और सिंचाई के लिए बिजली की मांग काफी बढ़ जाएगी, फिर भी वे पर्याप्त इंतजाम करने में नाकाम रहे।"

--आईएएनएस

ओपी/वीसी

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