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ब्रिक्स देशों ने अपनाया ‘गुवाहाटी घोषणा पत्र’, नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर

ब्रिक्स देशों ने अपनाया ‘गुवाहाटी घोषणा पत्र’, नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर
ब्रिक्स देशों ने अपनाया ‘गुवाहाटी घोषणा पत्र’, नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर

गुवाहाटी, 7 जुलाई (आईएएनएस)। असम के गुवाहाटी में आयोजित ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक मंगलवार को संपन्न हो गई। बैठक के समापन पर सदस्य देशों ने 'गुवाहाटी घोषणा पत्र' को अपनाते हुए अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

घोषणा पत्र में राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप समयबद्ध सूचना, खुफिया जानकारी और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके साथ ही अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कानून प्रवर्तन और नियामक प्रयासों को मजबूत करने के लिए नवीन तकनीकों, डिजिटल उपकरणों और डेटा-आधारित तरीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।

बैठक में ब्रिक्स देशों ने मादक पदार्थों की तस्करी के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की। सदस्य देशों ने सिंथेटिक ड्रग्स और नई मनो-सक्रिय पदार्थों (एनपीएस) के बढ़ते प्रसार, रसायनों के दुरुपयोग, उभरती तकनीकों और वर्चुअल संपत्तियों के गलत इस्तेमाल तथा समुद्री मार्गों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों पर चिंता जताई।

सदस्य देशों ने नशीले पदार्थों की मांग कम करने के लिए विशेष पहल को मजबूत करने, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और विशेष रूप से बच्चों तथा युवाओं सहित संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके लिए साक्ष्य-आधारित, व्यापक और जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई।

उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भारत ने ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ नियंत्रण एजेंसियों से सीमा-पार अपराध से निपटने के लिए तेज कार्रवाई, आपसी विश्वास और रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने पर आधारित साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने नशे के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है। इसके तहत 2026 से 2029 तक के लिए तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया है, जो नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि इस रणनीति का उद्देश्य पूरे आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना, जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से नशे की रोकथाम करना तथा उपचार, नशामुक्ति और पुनर्वास उपायों को मजबूत बनाना है।

बैठक के समापन पर अपने संबोधन में एनसीबी प्रमुख ने कहा कि 21वीं सदी में मादक पदार्थों की तस्करी अत्यधिक जुड़ी हुई और सीमाओं से परे संचालित होने वाली चुनौती बन चुकी है। ऐसे में राष्ट्रीय एंटी-ड्रग एजेंसियों को भी आपसी नेटवर्क बनाकर इन अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्कों को तोड़ना होगा।

उन्होंने ब्रिक्स देशों से गुवाहाटी घोषणा पत्र की भावना को आगे बढ़ाने और नशा-मुक्त विश्व तथा सुरक्षित एवं स्वस्थ वैश्विक समाज के साझा लक्ष्यों के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने ब्रिक्स वर्चुअल वर्किंग ग्रुप की स्थापना और सीमा-पार प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने का भी प्रस्ताव रखा।

दो दिवसीय बैठक के दौरान सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों में मादक पदार्थों की स्थिति पर चर्चा की और कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। इनमें रियल-टाइम ड्रग इंटरडिक्शन के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग, डार्कनेट के जरिए होने वाली तस्करी पर रोक, नई मनो-सक्रिय पदार्थों (एनपीएस) के बढ़ते खतरे से निपटना तथा रसायनों के दुरुपयोग और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा को मजबूत करना शामिल रहा।

वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण' विषय पर आधारित है। गुवाहाटी में आयोजित इस बैठक में ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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