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BREAKING : लुधियाना जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट का भंडाफोड़: पैसों के दम पर कैदियों को मिल रही थीं सुविधाएं, बड़ा अधिकारी निलंबित

BREAKING : लुधियाना जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट का भंडाफोड़: पैसों के दम पर कैदियों को मिल रही थीं सुविधाएं, बड़ा अधिकारी निलंबित

लुधियाना सेंट्रल जेल में कैदियों से पैसे लेकर उन्हें खास सुविधाएं देने का मामला सामने आया है। जेल के अतिरिक्त अधीक्षक बलवीर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने GST फ्रॉड से जुड़े मामलों में बंद 11 अंडरट्रायल कैदियों से बेहतर बैरक और सुविधाएं देने के बदले कथित तौर पर 2 लाख से 4 लाख रुपए तक लिए।

मामले की शिकायत मिलने के बाद गुप्त जांच कराई गई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद बलवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

लाखों रुपए लेकर बेहतर बैरक देने का आरोप

आरोप है कि बलवीर सिंह ने GST फ्रॉड मामलों में जेल में बंद 11 अंडरट्रायल कैदियों से मोटी रकम ली। इसके बदले कैदियों को सामान्य बैरक से हटाकर बेहतर सुविधाओं वाली बैरक में रखा गया।

शिकायत के बाद AIG मुख्यालय राजेश कुमार की ओर से गुप्त जांच कराई गई। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए।

भ्रष्टाचार कानून के तहत FIR

जांच के बाद आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बलवीर सिंह के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7 और 8 के साथ जेल अधिनियम की धारा 52-A के तहत FIR दर्ज की गई है।

सस्पेंशन ऑर्डर में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है। लुधियाना जेल के अधीक्षक कुलवंत सिंह सिद्धू ने भी FIR और निलंबन की पुष्टि की है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित मामले में जेल के किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका भी थी या नहीं।

लुधियाना जेल में पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले

लुधियाना सेंट्रल जेल में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।

जून 2021 में जेल के अंदर कैदियों के हुक्का पीने का वीडियो वायरल हुआ था। जांच के बाद तीन जेल कर्मचारियों को निलंबित किया गया था।

इसके बाद जनवरी 2024 में जेल के अंदर एक अंडरट्रायल कैदी की बर्थडे पार्टी का वीडियो सामने आया था। बताया गया कि कैदी अरुण कुमार उर्फ ‘मणि राणा’ ने करीब 10 से 15 साथियों के साथ बैरक में जन्मदिन मनाया था और इसका वीडियो इंटरनेट पर शेयर किया गया था।

इस मामले की जांच के दौरान दो डिप्टी जेल अधीक्षकों की गिरफ्तारी भी हुई थी। उन पर कैदियों तक मोबाइल फोन और प्रतिबंधित सामान पहुंचाने के बदले रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए थे।

जेल में नशीले पदार्थों की सप्लाई से जुड़ा मामला भी सामने आ चुका है। एक वार्डर को करीब 60 ग्राम गांजा जेल के अंदर ले जाने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था।

इसके अलावा ड्यूटी से लंबे समय तक गैरहाजिर रहने, बिना अनुमति छुट्टी देने और गलत तरीके से आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने जैसे मामलों में भी जेल कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

फिलहाल पुलिस नए मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर पैसे लेकर कैदियों को सुविधाएं देने के मामले में सिर्फ एक अधिकारी शामिल था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था।

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