BREAKING : उज्जैन शाही मस्जिद पर कानूनी गाज: 3 फीट अतिक्रमण हटाने पर हाईकोर्ट की मुहर, प्रशासन की तैयारी तेज
मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को सड़क चौड़ीकरण की जद से हटाने को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत के फैसले के बाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल अपील पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इससे सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है।
हालांकि, मुस्लिम पक्ष के वकील की ओर से अदालत में यह बात रखी गई कि हटाया जाने वाला हिस्सा करीब तीन फीट तक सीमित रहेगा। इसी को लेकर अब पूरे मामले में तीन फीट की सीमा सबसे ज्यादा चर्चा में है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। नगर निगम की योजना के मुताबिक कुछ सड़क मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है और सड़क की प्रस्तावित लाइन में आने वाले निर्माणों को हटाया जा रहा है।
इसी सड़क के दायरे में शाही मस्जिद का एक हिस्सा भी आ रहा है। नगर निगम का कहना है कि यह कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत की जा रही है। अदालत के पहले के आदेश में भी सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन की जरूरतों को ध्यान में रखा गया था।
पहले भी कोर्ट पहुंचा था मामला
इस मामले में 9 सितंबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने माना था कि नगर निगम ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है।
अदालत के सामने यह दलील भी दी गई थी कि कार्रवाई केवल मस्जिद को निशाना बनाकर नहीं की जा रही है। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, उसी सड़क पर अन्य धार्मिक संरचनाओं के हिस्सों को भी सड़क चौड़ीकरण के तहत हटाया गया है।
तीन फीट को लेकर क्या कहा गया?
अब मस्जिद कमेटी की ओर से दायर अपील की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने कथित तौर पर यह बात रखी कि मस्जिद का केवल करीब तीन फीट हिस्सा हटाया जाए। साथ ही, पहले नगर निगम और मस्जिद कमेटी के बीच हुई बातचीत में तय मुआवजा/निर्माण अधिकारों से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
यहां यह समझना जरूरी है कि तीन फीट का उल्लेख मुस्लिम पक्ष के वकील की ओर से बताए गए समझौते/शर्त के संदर्भ में है। इसलिए इसे पूरे मस्जिद परिसर के लिए कोई सामान्य नियम समझना सही नहीं होगा।
FAR और TDR का भी जिक्र
मामले में FAR यानी Floor Area Ratio और TDR यानी Transferable Development Rights का भी उल्लेख सामने आया है। मस्जिद कमेटी की ओर से कहा गया कि प्रभावित हिस्से को हटाने के बदले पहले हुए समझौते के अनुसार इनसे जुड़े लाभ दिए जाने की बात हुई थी।
मसलन, TDR का इस्तेमाल कई मामलों में विकास अधिकारों को दूसरी जगह ट्रांसफर करने की व्यवस्था के तौर पर किया जाता है, जबकि FAR किसी प्लॉट पर कुल अनुमत निर्माण क्षेत्र से संबंधित होता है।
विवाद के बीच बढ़ी सुरक्षा
कोर्ट की कार्यवाही के साथ-साथ जमीन पर भी तनाव देखने को मिला। 28 सितंबर को मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हुए और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी। पथराव की घटना के बाद पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया।
इससे पहले रविवार रात भी बड़ी संख्या में लोग मस्जिद परिसर में जुटे थे और प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। प्रशासन ने बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की थी।
अब आगे क्या?
फिलहाल विवाद का कानूनी पक्ष अदालत के आदेश और प्रशासन-मस्जिद कमेटी के बीच हुई बातचीत की शर्तों से जुड़ा है। वहीं जमीन पर प्रशासन सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ की तैयारियों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि अदालत में बताई गई शर्तों के मुताबिक प्रभावित हिस्सा कितनी सीमा तक हटाया जाता है और FAR-TDR से जुड़े आश्वासनों को किस तरह लागू किया जाता है। इस पूरे मामले पर प्रशासन, मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों की आगे की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

