Breaking News: पार्किंग में ले जाते वक्त खंभे से टकराया इंडिगो विमान, बड़ा नुकसान, सभी यात्री सुरक्षित
श्रीनगर एयरपोर्ट पर शुक्रवार सुबह इंडिगो का एक विमान पार्किंग के दौरान खंभे से टकरा गया। हादसा फ्लाइट 6E 225 (VT-NOG) को पार्किंग बे नंबर-6 में खड़ा करते समय हुआ। विमान सुबह करीब 9 बजे नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंचा था।टक्कर के समय विमान में करीब 200 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद सभी यात्रियों और क्रू सदस्यों को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित विमान से उतार लिया गया।हादसे के बाद विमान के अगले हिस्से यानी नोज को नुकसान पहुंचा है। विमान की नोज का एक हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर की ओर दब गया। घटना की वजह का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन फिलहाल सामान्य बताया जा रहा है और अन्य उड़ानें अपने निर्धारित समय के अनुसार संचालित हो रही हैं।
जिस खंभे से टकराया विमान, वह VDGS का हिस्सा
विमान जिस खंभे से टकराया, वह विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) का हिस्सा है। यह सिस्टम एयरपोर्ट के पार्किंग बे में विमान को सही दिशा में लाने और तय स्थान पर सुरक्षित तरीके से रोकने में पायलट की मदद करता है।VDGS के डिस्प्ले के जरिए पायलट को विमान की सेंटरलाइन, दिशा और पार्किंग की निर्धारित जगह से जुड़ी जानकारी मिलती है। आधुनिक सिस्टम विमान के प्रकार की पहचान करने के साथ यह भी बता सकते हैं कि विमान को रुकने की जगह तक कितनी दूरी तय करनी है।
हादसे की 5 संभावित वजहें क्या हो सकती हैं?
घटना की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही टक्कर की वास्तविक वजह सामने आएगी। हालांकि, इस तरह की पार्किंग दुर्घटना के पीछे कुछ संभावित कारण हो सकते हैं:
1. विमान का सेंटरलाइन से हट जाना
पार्किंग के दौरान विमान निर्धारित सेंटरलाइन से थोड़ा हट गया हो और इसी वजह से खंभे से टक्कर हुई हो।
2. VDGS के संकेत को समझने में गलती
डिस्प्ले या लाइट से मिलने वाले संकेत को सही तरीके से फॉलो न कर पाना भी एक वजह हो सकती है।
3. विजिबिलिटी की समस्या
बारिश, धुंध या किसी अन्य कारण से पायलट को पार्किंग एरिया में मौजूद पोल या मार्किंग स्पष्ट दिखाई न दी हो।
4. VDGS में तकनीकी खराबी
जांच में यह भी देखा जाएगा कि पार्किंग गाइडेंस सिस्टम ने सही दिशा और दूरी के संकेत दिए थे या नहीं।
5. विमान की गति या ब्रेकिंग से जुड़ी समस्या
पार्किंग के दौरान विमान को तय जगह पर रोकने में मामूली चूक या ब्रेकिंग से जुड़ी दिक्कत भी जांच का हिस्सा हो सकती है।
इनमें से किसी भी वजह को फिलहाल हादसे का कारण नहीं माना जा सकता। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
VDGS कैसे करता है काम?
विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम यानी VDGS एयरपोर्ट के पार्किंग बे में लगाया जाता है। इसका काम पायलट को विमान को सही सेंटरलाइन पर रखते हुए निर्धारित स्थान तक पहुंचाने और सुरक्षित तरीके से रोकने में सहायता करना है।
सिस्टम सेंसर की मदद से विमान की स्थिति का पता लगाता है। इसके बाद डिस्प्ले पर पायलट को दिशा, सेंटरलाइन और रुकने की जगह से संबंधित संकेत दिखाई देते हैं।
आधुनिक VDGS विमान के मॉडल या प्रकार की पहचान करने और पार्किंग पोजिशन तक बची दूरी की जानकारी देने में भी सक्षम होते हैं।
विमान की नोज को नुकसान होने पर उड़ान क्यों रोकी जाती है?
विमान के सबसे आगे वाले हिस्से को रेडोम कहा जाता है। इसके पीछे आमतौर पर वेदर रडार लगा होता है। यह रडार उड़ान के दौरान बारिश, तूफान और खराब मौसम जैसी स्थितियों का पता लगाने में मदद करता है।
रेडोम रडार को बाहरी नुकसान से बचाता है और रेडियो तरंगों को इसके आर-पार जाने देता है। इसके अलावा विमान की नोज और आसपास के हिस्से में पिटोट ट्यूब, एंगल ऑफ अटैक सेंसर, तापमान सेंसर और एंटीना जैसे महत्वपूर्ण उपकरण भी हो सकते हैं।
ऐसे में पार्किंग के दौरान नोज पर टक्कर होने के बाद विमान को दोबारा उड़ाने से पहले उसकी विस्तृत तकनीकी जांच जरूरी होती है। इंजीनियर यह जांचते हैं कि सिर्फ बाहरी कवर को नुकसान पहुंचा है या अंदर लगे महत्वपूर्ण सेंसर और सिस्टम भी प्रभावित हुए हैं।
इससे पहले भी इंडिगो की फ्लाइट में आई थी तकनीकी खराबी
2 सितंबर: गोवा-दिल्ली फ्लाइट के इंजन में आई खराबी
इससे पहले 2 सितंबर को गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 2102 में उड़ान भरने के कुछ समय बाद इंजन से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई थी।
करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर समस्या का पता चलने के बाद विमान को वापस मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाया गया था। विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और यात्रियों को दूसरे विमान से आगे भेजे जाने की व्यवस्था की गई।
श्रीनगर में हुई ताजा घटना में फिलहाल सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं और एयरपोर्ट का सामान्य संचालन जारी है। हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

