BREAKING: Manipur Violence: मणिपुर में नगा-कुकी संघर्ष से बढ़ा तनाव, 10 लोगों की मौत के बाद कर्फ्यू; कई घरों में आगजनी
मणिपुर के कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में नगा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पों के बाद तनाव बढ़ गया है। इन घटनाओं में 10 लोगों की मौत की खबर है। हालात को देखते हुए रविवार को प्रभावित इलाकों में 24 घंटे का कर्फ्यू लागू रहा और बाजार बंद रहे। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।
संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान
प्रशासन ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सीआरपीएफ, असम राइफल्स, कोबरा बटालियन और मणिपुर पुलिस कमांडो की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की हैं। पुलिस के मुताबिक, उपद्रवियों की तलाश में माकुई अशांग, तपोन और चसाड जैसे संवेदनशील इलाकों में घर-घर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद रात के समय गोलीबारी हुई। सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के बीच भय का माहौल है और कई परिवार घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
14 घरों में आगजनी, थाने को भी निशाना बनाने की कोशिश
शनिवार को चसाड इलाके में हिंसा और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, नगा और कुकी समुदायों के 14 घर जला दिए गए। उपद्रवियों ने चसाड थाने में भी आग लगाने की कोशिश की।
पुलिस के मुताबिक, चसाड थाने के पास अवैध बंकर बनाए जाने की सूचना पर अभियान चलाया गया था। इस दौरान कुछ महिलाओं ने निर्माण रोकने की कोशिश की। इसके बाद अज्ञात हमलावरों ने सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी की, जिसमें 42 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई। इसके बाद इलाके में गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं हुईं।
बताई गई जानकारी के अनुसार, मृतकों में छह नगा, तीन कुकी और एक नेपाली नागरिक शामिल हैं।
सीमा पार से उग्रवादियों की घुसपैठ का आरोप
पिलोंग में 24 सितंबर को तांगखुल नगा समुदाय के लोगों की हत्या के मामले में कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) और म्यांमार स्थित पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) के कुछ गुटों के नाम सामने आने की बात कही गई है। शनिवार को भारत-म्यांमार सीमा के पास चसाड में सीमा स्तंभ 102 के नजदीक KNA-B के तीन उग्रवादियों के मारे जाने की सूचना भी सामने आई।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सीमा पार से आने वाले उग्रवादी हमलों को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि, इन घटनाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
कई जिलों तक फैला नगा-कुकी संघर्ष
नगा और कुकी समुदायों के बीच तनाव पहले उखरुल जिले तक सीमित बताया जा रहा था, लेकिन अब कांगपोकपी, कामजोंग, सेनापति, तामेंगलोंग और नोनी के कुछ हिस्सों में भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। इन क्षेत्रों में दोनों समुदायों के लोग साथ रहते हैं। मौजूदा हालात में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उग्रवादियों को शरण देने और इलाके में वर्चस्व कायम करने के आरोप लगा रहे हैं।
फरवरी से संघर्ष की घटनाओं में कई लोगों की मौत
इस साल फरवरी से मणिपुर के अलग-अलग इलाकों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। इनमें गोलीबारी, आगजनी और गांवों पर हमलों की खबरें शामिल हैं।
- 7–11 फरवरी: उखरुल जिले के लितान इलाके में युवकों के बीच विवाद के बाद तनाव बढ़ा। इसके बाद पत्थरबाजी, गोलीबारी और घरों में आगजनी की घटनाएं हुईं।
- 24–25 अप्रैल: उखरुल के सिनाकीथेल और मुल्लम गांवों के आसपास गोलीबारी में कम से कम तीन लोगों की मौत की खबर आई।
- 7–8 मई: उखरुल और कामजोंग जिलों में गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं हुईं। कई लोगों के घायल होने और घरों को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली।
- अगस्त के आखिरी दिन: नगा और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा में सात लोगों की मौत की खबर सामने आई।
- सितंबर: संघर्ष का दायरा बढ़ने के साथ दोनों समुदायों के बीच तनाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ीं।
शांति बहाली प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
लगातार हो रही हिंसा ने मणिपुर में सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कर्फ्यू, तलाशी अभियान और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती के बीच प्रशासन के सामने आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा हिंसा को और फैलने से रोकने की चुनौती है। प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य करने के लिए सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ दोनों समुदायों के बीच संवाद और भरोसा बहाल करना भी अहम होगा।

