Samachar Nama
×

BREAKING: आज सड़क पर 'संसद' चलाएगा INDIA ब्लॉक, CEC पर लाएगा जनमहाभियोग; जानें क्यों रैली टालने की उठ रही मांग

BREAKING: आज सड़क पर 'संसद' चलाएगा INDIA ब्लॉक, CEC पर लाएगा जनमहाभियोग; जानें क्यों रैली टालने की उठ रही मांग

देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। वोट चोरी और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाला INDIA गठबंधन केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में है। शनिवार, 31 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ का प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित करेगा। वहीं, रविवार 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली और मार्च की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली के व्यापारियों ने प्रस्तावित महारैली को टालने की अपील की है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

आज खरगे के आवास पर जुटेंगे विपक्षी नेता

INDIA गठबंधन का जन महाभियोग कार्यक्रम पहले शुक्रवार को आयोजित होना था, लेकिन दिल्ली में बारिश के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अब यह कार्यक्रम शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित किया जाना है। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम दोपहर 3:30 बजे निर्धारित है।

इस कार्यक्रम को विपक्ष ने ‘सड़क पर संसद’ का नाम दिया है। इसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कर सकती हैं। विपक्षी दलों के नेता एक प्रतीकात्मक संसदीय प्रक्रिया के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी शिकायतें और आरोप सार्वजनिक रूप से रखेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रस्ताव पेश करेंगे, जबकि राहुल गांधी के समापन संबोधन देने की संभावना है।

इस आयोजन में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दलों और INDIA गठबंधन के अन्य सहयोगियों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, यह कार्यक्रम प्रतीकात्मक है और इसे संवैधानिक रूप से लागू होने वाली वास्तविक महाभियोग प्रक्रिया नहीं समझना चाहिए।

आखिर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों मोर्चा खोल रहा विपक्ष?

विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी अनियमितताओं को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाता रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े विवादों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों, आधिकारिक जवाबों और कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना जरूरी है।

राहुल गांधी ने जनता से की दिल्ली पहुंचने की अपील

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विपक्ष के आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश की है। गठबंधन की ओर से राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छात्रों, महिलाओं, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और आम नागरिकों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है।

राहुल गांधी ने इस अभियान को संविधान और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा से जोड़ते हुए विपक्षी एकजुटता पर जोर दिया है। कांग्रेस का दावा है कि यह केवल अलग-अलग राजनीतिक दलों का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग से जुड़ा साझा अभियान है।

विपक्षी दलों का अगला बड़ा कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित है। इस रैली के जरिए गठबंधन वोट चोरी के आरोपों और SIR से जुड़े विवादों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहता है।

रामलीला मैदान की महारैली पर क्यों उठने लगी टालने की मांग?

एक तरफ INDIA गठबंधन महारैली की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के कारोबारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है।

व्यापारियों का कहना है कि दिवाली के आसपास बाजारों में ग्राहकों की भीड़ और खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़े राजनीतिक आयोजन के कारण यातायात बाधित होने, पार्किंग की समस्या पैदा होने और बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित होने की आशंका है।

CTI ने गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह रैली का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों और आम लोगों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए तारीख या व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की अपील कर रहा है।

अब सवाल यह है कि क्या विपक्षी गठबंधन व्यापारियों की इस मांग पर विचार करेगा या तय कार्यक्रम के मुताबिक ही महारैली आयोजित की जाएगी? फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में रैली को स्थगित किए जाने की पुष्टि नहीं है।

अमित शाह की चुनौती के बाद सियासी बहस तेज

इस राजनीतिक टकराव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को संसद में इन आरोपों पर चर्चा करने की चुनौती दी और कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।

इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। जहां भाजपा विपक्ष से अपने आरोपों को संसद में रखने की बात कह रही है, वहीं विपक्ष का जोर सड़क पर आंदोलन और जनता के बीच इस मुद्दे को उठाने पर है।

आगे क्या होगा?

31 अक्टूबर को होने वाला प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम और 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली, दोनों ही INDIA गठबंधन की आगे की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। विपक्ष इन आयोजनों के जरिए अपने सहयोगियों को एक मंच पर लाने और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को प्रमुखता देने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी तरफ, व्यापारियों की अपील, यातायात व्यवस्था और दिल्ली में सुरक्षा इंतजाम भी इस आयोजन से जुड़े अहम मुद्दे बने हुए हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रविवार की महारैली में कितनी भागीदारी होती है और विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष तथा चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

फिलहाल बड़ी अपडेट यह है कि INDIA गठबंधन का प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम बारिश के कारण शुक्रवार से शनिवार के लिए टाला गया था। अब यह 31 अक्टूबर को खरगे के आवास पर प्रस्तावित है, जबकि रामलीला मैदान की महारैली 1 नवंबर के लिए निर्धारित है। व्यापारियों ने इसे टालने की अपील की है, लेकिन रैली स्थगित होने की पुष्टि नहीं हुई है।

Share this story

Tags