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BREAKING : नक्सलवाद का एक और बड़ा चैप्टर क्लोज! 3 राज्यों में वांटेड ढाई करोड़ के इनामी सरगना का सरेंडर, देखें पूरी रिपोर्ट

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झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में करीब चार दशकों से माओवादी गतिविधियों से जुड़ा असीम मंडल आखिरकार सुरक्षा एजेंसियों के सामने आ गया। लंबे समय तक सारंडा के घने जंगलों से माओवादी गतिविधियों को संचालित करने वाला असीम मंडल उर्फ आकाश ने गुरुवार को कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF के सामने सरेंडर कर दिया।

असीम मंडल पर झारखंड और ओडिशा में कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं।

किशनजी की मौत के बाद सारंडा पहुंचा था

साल 2011 में शीर्ष माओवादी नेता किशनजी के मारे जाने के बाद असीम मंडल जंगलमहल क्षेत्र से हटकर झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा के घने जंगलों में पहुंच गया था।

बताया जाता है कि उसने लंबे समय तक सारंडा के जंगलों से अपनी गतिविधियां संचालित कीं। हालांकि, हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने सारंडा इलाके में माओवादी संगठनों के खिलाफ दबाव बढ़ाया तो असीम मंडल अपने दस्ते के साथ पश्चिम बंगाल की ओर चला गया।

अगस्त में उसके दस्ते से जुड़े कई माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और बढ़ गई थी।

कौन है असीम मंडल?

64 वर्षीय असीम मंडल संगठन में आकाश, तिमिर और मनोज जैसे कई नामों से जाना जाता रहा है। वह पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के फुलचक गांव का रहने वाला बताया जाता है।

छात्र जीवन में वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होने के बाद वह पीपुल्स वार ग्रुप यानी PWG से जुड़ा और बाद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का हिस्सा बन गया।

सारेंगा, गोआलतोड़ और झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के गुराबंदा इलाके में संगठन को मजबूत करने के बाद वह जंगलमहल क्षेत्र में सक्रिय रहा। वर्ष 2010 में उसे पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी का सचिव बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद में वह बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्रीय कमेटी में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा।

जंगल में AK-47 छोड़ी और बदलता रहा ठिकाना

पुलिस के मुताबिक, खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच असीम मंडल ने अपना सशस्त्र दस्ता भंग कर दिया था।

बताया गया है कि अगस्त में उसने जंगल में एक AK-47 और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज छोड़ दिए और कार से किसी सुरक्षित ठिकाने की ओर निकल गया। इसके बाद वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा।

पुलिस के अनुसार, वह परिचितों और रिश्तेदारों के घरों में छिपकर रह रहा था और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए भेष भी बदलता था।

असीम मंडल पर था 2.20 करोड़ का इनाम

असीम मंडल पर झारखंड सरकार की ओर से 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से उसके ऊपर 1.20 करोड़ रुपये का इनाम बताया गया है।

इस तरह उस पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सितंबर की शुरुआत में पुलिस ने असीम मंडल समेत छह वांछित माओवादियों के पोस्टर भी जारी किए थे।

उसके दस्ते के कई सदस्य कर चुके हैं सरेंडर

असीम मंडल के दस्ते पर सुरक्षा बलों के साथ कई मुठभेड़ों और हमलों में शामिल होने के आरोप रहे हैं।

मार्च 2026 में पश्चिमी सिंहभूम के मारांगपोंगा इलाके में उसके दस्ते और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान 209 कोबरा बटालियन के एक अधिकारी समेत दो सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।

इसके अलावा, उसके दस्ते से जुड़े कई सदस्य पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सितंबर में 15 लाख रुपये के इनामी रामप्रसाद मार्डी, 10 लाख रुपये की इनामी मीता और एक अन्य महिला माओवादी ने पश्चिम बंगाल पुलिस के सामने सरेंडर किया था।

पत्नी भी माओवादी संगठन से जुड़ी रही

असीम मंडल की पत्नी भी माओवादी संगठन से जुड़ी रही है। वह पूर्व मेदिनीपुर के पोटाशपुर की रहने वाली बताई जाती है। वर्ष 2010 में STF ने उसे गिरफ्तार किया था।

अब असीम से क्या जानकारी मिलेगी?

असीम मंडल के सरेंडर के बाद सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एजेंसियां उससे माओवादी संगठन के बचे हुए कैडरों, हथियारों, पुराने ठिकानों और नेटवर्क से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकती हैं।

उसके सरेंडर से झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़े इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क और उसकी मौजूदा स्थिति के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।

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