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BREAKING : 2026 Nobel Prize: कनाडाई पोएट ऐन कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल, 'द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड' से बटोरी थी सुर्खियां

BREAKING : 2026 Nobel Prize: कनाडाई पोएट ऐन कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल, 'द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड' से बटोरी थी सुर्खियां

कनाडाई लेखिका और कवयित्री ऐन कार्सन अपनी अनोखी लेखन शैली के लिए जानी जाती हैं। उनकी रचनाओं में प्राचीन मिथकों, प्रेम, रिश्तों, हिंसा और मानवीय भावनाओं का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो पुरानी कहानियों को एक बिल्कुल नया नजरिया देता है।उनकी चर्चित रचनाओं में ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड: ए नॉवेल इन वर्स’ भी शामिल है। 1998 में प्रकाशित यह किताब हजारों साल पुरानी यूनानी कथा से प्रेरित है।

राक्षस की कहानी को बना दिया प्यार और हिंसा की कहानी

‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड’ में गेरियोन नाम के एक पंखों वाले लाल राक्षस की कहानी है। हालांकि ऐन कार्सन ने इस किरदार को सिर्फ एक राक्षस के रूप में पेश नहीं किया।उन्होंने गेरियोन के चरित्र को मानवीय भावनाओं से जोड़ते हुए उसे एक संवेदनशील युवक के रूप में सामने रखा, जो अपनी मां से गहरा लगाव रखता है। इस तरह एक प्राचीन यूनानी मिथक को प्रेम, हिंसा, रिश्तों और पहचान जैसे आधुनिक मानवीय अनुभवों से जोड़ दिया गया।

‘नॉक्स’ में भाई की यादों को शब्द दिए

ऐन कार्सन की दूसरी चर्चित किताब ‘नॉक्स’ है, जो 2010 में प्रकाशित हुई थी। यह रचना उनके भाई माइकल की याद में लिखी गई थी।माइकल की साल 2000 में डेनमार्क में मृत्यु हो गई थी। उनकी जिंदगी के आखिरी दौर में वह रहस्यमय तरीके से परिवार से दूर हो गए थे। भाई की याद और उनके साथ जुड़े भावनात्मक अनुभवों को कार्सन ने इस किताब के जरिए एक अलग साहित्यिक रूप दिया।

‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ में रिश्ते और धोखे की कहानी

साल 2001 में प्रकाशित ‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ भी ऐन कार्सन की महत्वपूर्ण रचनाओं में गिनी जाती है। इसमें एक ऐसे वैवाहिक रिश्ते की कहानी है, जहां पति अपनी पत्नी को धोखा देता है।कार्सन ने इस कहानी को 29 हिस्सों में बांटा। खास बात यह है कि हर हिस्सा कवि जॉन कीट्स की पंक्तियों से शुरू होता है। किताब के जरिए प्रेम, विवाह, बेवफाई और टूटते रिश्तों की जटिलताओं को साहित्यिक अंदाज में सामने रखा गया है।

पिछले 10 साल में साहित्य नोबेल जीतने वाली 5 महिलाएं

पिछले एक दशक में साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाले 10 लेखकों में 5 महिलाएं शामिल रही हैं। इस अवधि के विजेताओं में कई ऐसे लेखक भी रहे, जिन्होंने अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में साहित्य रचा।इनमें 2024 की साहित्य नोबेल विजेता दक्षिण कोरिया की हान कांग भी शामिल हैं। वह एशिया से इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को हासिल करने वाली प्रमुख लेखिकाओं में शामिल हुईं।इस अवधि में दक्षिण एशिया से किसी लेखक को साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।

आखिर कैसे चुना जाता है साहित्य का नोबेल विजेता?

साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए हर साल नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं। स्वीडिश अकादमी के सदस्य, साहित्य और भाषा के प्रोफेसर, पूर्व नोबेल पुरस्कार विजेता और लेखक संगठनों के प्रमुख योग्य लेखकों के नाम प्रस्तावित कर सकते हैं।खास बात यह है कि लेखक खुद को नामांकित नहीं कर सकता।नोबेल कमेटी शुरुआती दौर में बड़ी संख्या में नामों पर विचार करती है। इसके बाद संभावित उम्मीदवारों की सूची को छोटा किया जाता है और अंत में स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्य मतदान के जरिए विजेता का चयन करते हैं।

50 साल तक गुप्त रहते हैं नामांकन

नोबेल पुरस्कार से जुड़ी एक खास बात यह है कि नामांकन की जानकारी तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाती। स्वीडिश अकादमी नामांकित लेखकों की लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट जारी नहीं करती।नामांकन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रखी जाती है। इसका मतलब है कि 2026 में साहित्य के नोबेल के लिए किन-किन लेखकों के नाम प्रस्तावित किए गए थे, इसकी पूरी जानकारी कई दशक बाद ही सामने आएगी।

कई भारतीय लेखक भी रह चुके हैं नामांकित

नोबेल के रिकॉर्ड के मुताबिक, भारत के कई चर्चित साहित्यकारों के नाम अलग-अलग वर्षों में साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किए जा चुके हैं।इनमें सर्वपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आर.के. नारायण जैसे प्रसिद्ध नाम शामिल हैं।हालांकि नामांकन होना अपने आप में पुरस्कार मिलने की गारंटी नहीं होता। नोबेल की चयन प्रक्रिया लंबी और बेहद गोपनीय होती है, जिसके अंतिम चरण में स्वीडिश अकादमी के सदस्य विजेता का फैसला करते हैं।

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