बीपीएससी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र : किसी ने 16 घंटे पढ़कर तो किसी ने चौथे प्रयास में पाई सफलता
पटना, 13 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना के बापू सभागार में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह कई युवाओं के लिए यादगार दिन बन गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा में सफल 2,027 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ-साथ एसडीएम, डीएसपी, रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर और विभिन्न विभागों में चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद सफल अभ्यर्थियों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। किसी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता की मेहनत और परिवार के सहयोग को दिया तो किसी ने लंबे संघर्ष, धैर्य और लगातार पढ़ाई को सफलता की वजह बताया। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद मिला नियुक्ति पत्र उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक है।
रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर चयनित आदित्य जैन के लिए यह सफलता बेहद खास है। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले आदित्य ने बताया कि वह किसान परिवार से हैं और अपने गांव से सरकारी नौकरी में इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं। वह बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। ऐसे परिवार से निकलकर इस पद तक पहुंचना गर्व और खुशी का विषय है। उनकी सफलता में उनके माता-पिता, भाई, बहनों और पूरे परिवार का बड़ा योगदान रहा है। बड़े भाई ने हमेशा हौसला बढ़ाया और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने परिवार के समर्थन को सफलता का आधार बताया।
आदित्य जैन की मां राजमणि जैन भी बेटे की सफलता से बेहद भावुक और खुश नजर आईं। उन्होंने बताया कि बेटे ने सफलता हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की। आदित्य पढ़ाई में इस कदर डूबा रहता था कि उसे खाना-पीना तक याद नहीं रहता था। उसे कई बार फोन करके कहना पड़ता था कि बेटा खाना खा लो। बेटे को इस मुकाम पर देखकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है।
आदित्य के पिता अशोक जैन ने कहा कि बेटे की सफलता से उन्हें बहुत खुशी है। उन्होंने बताया कि आदित्य ने 12वीं कक्षा से ही पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया और तभी से लगातार संघर्ष करता रहा। वह खुद छोटे किसान हैं, लेकिन उनके बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया। आदित्य कई बार 16-16 घंटे तक पढ़ाई करता था। बेटे के संघर्ष का आज परिणाम सामने आया है।
सफल अभ्यर्थी शशांक गौरव ने नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और यादगार पल बताया। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना बेहद खुशी की बात है। शशांक ने अपनी सफलता में परिवार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अपने पिता सुभाष ओझा को प्रेरणा स्रोत बताया। साथ ही बड़े भाई शशांक सौरभ और छोटे भाई शशांक अभिनव के सहयोग को भी अपनी सफलता के लिए अहम बताया। परिवार के ये सदस्य उनके जीवन के मजबूत स्तंभ रहे हैं और उनके सहयोग के कारण ही वह इस मुकाम तक पहुंच सके।
मनीषा पटेल ने नियुक्ति पत्र मिलने पर कहा कि यह उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना बेहद खुशी और गर्व का विषय है। यह सफलता वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने इस सुनहरे पल के लिए भगवान का भी आभार जताया। उनके अनुसार, लंबे समय तक मेहनत करने के बाद जब सफलता सामने आती है तो उसकी खुशी अलग ही होती है।
नागमणि कुमार का चयन बिहार प्रशासनिक सेवा में हुआ है। उन्होंने बताया कि यह उनका बीपीएससी का चौथा प्रयास और चौथा साक्षात्कार था। वह पिछले करीब 12 वर्षों से बीएसएनएल में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। लंबे समय तक नौकरी करने के बाद उन्होंने बीपीएससी में लगातार प्रयास जारी रखा और आखिरकार 70वीं बीपीएससी में बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए उनका चयन हो गया। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उन्होंने खुशी जताई और इसे अपने लिए बेहद गौरवपूर्ण क्षण बताया।
कविता कुमारी का चयन भी बिहार प्रशासनिक सेवा में हुआ है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करना उनके लिए बेहद खुशी का अवसर है। उन्होंने बिहार सरकार में युवाओं को मिल रहे अवसर को बड़ी उपलब्धि बताया। कविता ने बताया कि उन्होंने डेंटिस्ट्री की पढ़ाई की है, लेकिन उनका लक्ष्य सरकारी सेवा और सिविल सर्विस में जाना था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बीपीएससी की तैयारी शुरू की। उन्होंने यह भी कहा कि 69वीं बीपीएससी में उन्होंने मुख्य परीक्षा भी दी थी, लेकिन वह मेंस में सफल नहीं हो पाई थीं।
अमरदीप कुमार ने कहा कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक मेहनत करता है और उसके बाद सफलता मिलती है तो उसका अनुभव बेहद खास होता है। प्रतियोगी परीक्षा का संघर्ष लंबा हो सकता है, अभ्यर्थियों को धैर्य बनाए रखना जरूरी है। पद ग्रहण करने के बाद उनकी प्राथमिकता अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करना है। लोगों की समस्याओं को सुनना और अधिकार क्षेत्र में उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करना उनकी जिम्मेदारी होगी।
भाव्या कृति ने नियुक्ति पत्र मिलने पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि वह खुद को बेहद आभारी और भाग्यशाली महसूस कर रही हैं। एक अभ्यर्थी से अधिकारी बनने का सफर लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है। इस सफर में सिर्फ बौद्धिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की भी जरूरत होती है। कई बार अभ्यर्थियों को कठिन परिस्थितियों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन लगातार प्रयास और धैर्य से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। भाव्या ने अपने माता-पिता, भगवान और सरकार का आभार जताते हुए कहा कि एक साथ करीब 2 हजार से अधिक लोगों को नियुक्ति मिलना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि वह इस अवसर को लेकर बेहद कृतज्ञ हैं।
--आईएएनएस
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