बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग पर विस्थापितों का आंदोलन तेज, मेन गेट छोड़ कंपनी के तमाम गेट जाम
बोकारो, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में स्थायी नियोजन की मांग को लेकर विस्थापित परिवारों का आंदोलन शुक्रवार को और तेज हो गया। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के सातवें दिन आंदोलनकारियों ने मेन गेट को छोड़कर संयंत्र के अन्य सभी प्रवेश द्वार अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए। इससे कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। ड्यूटी पर पहुंचे कुछ कर्मचारियों को वापस लौटना पड़ा, जबकि कई कर्मचारी मुख्य गेट से संयंत्र में प्रवेश करते दिखे।
विस्थापित अप्रेंटिस संघ और विस्थापित परिवारों से जुड़े आंदोलनकारियों की इस कार्रवाई से नियोजन के मुद्दे पर प्रबंधन के साथ जारी गतिरोध और बढ़ गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाने और बातचीत के बावजूद नियुक्ति को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। वे अब आश्वासन के बजाय नियोजन की स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा चाहते हैं।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, विस्थापित परिवार के प्रेम महतो की मौत के बाद हुई त्रिपक्षीय वार्ता में नियोजन के मुद्दे पर सहमति बनी थी, लेकिन करीब 16 महीने गुजरने के बाद भी उस पर अमल नहीं हुआ। उनका आरोप है कि विस्थापित परिवारों ने संयंत्र की स्थापना के लिए जमीन दी और उनके युवाओं ने अप्रेंटिस का प्रशिक्षण भी पूरा किया, लेकिन स्थायी रोजगार का इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी पहले की व्यवस्था के अनुरूप चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियोजन और प्रशिक्षण पूरा कर चुके विस्थापित अप्रेंटिस युवाओं की नियमित बहाली और विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति लागू करने की भी मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि प्रशिक्षण के बाद भी नौकरी नहीं मिलने से युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पहले आंदोलनकारियों ने गेट नंबर 9 और 10 बंद कर प्रबंधन को चेतावनी दी थी कि मांगों पर निर्णय नहीं होने पर आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 106 युवक टू-टैंक गार्डन के पास भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया था। गेट बंद होने से संयंत्र के सामान्य संचालन पर असर पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।
बीएसएल के सुरक्षा विभाग ने पहले प्रशासन को पत्र लिखकर आंदोलन से उत्पादन और औद्योगिक सुरक्षा पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। प्रबंधन ने आंदोलनकारियों से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी। बोकारो की विधायक श्वेता सिंह सातवें दिन भी आंदोलनकारियों के साथ धरने पर बैठी हैं। फिलहाल आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हैं और भूख हड़ताल समाप्त करने को लेकर कोई संकेत नहीं मिला है।
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