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बीएमसी चुनाव: विवेक रंजन अग्निहोत्री ने की वोटर्स से अपील, मतदान से पहले ये बात जरूर ध्यान रखें

मुंबई, 15 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में गुरुवार को 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान चल रहा है। मतदान से पहले फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने आमजन से वोट डालने से पहले कुछ बातों पर गौर करने की सलाह दी।
बीएमसी चुनाव: विवेक रंजन अग्निहोत्री ने की वोटर्स से अपील, मतदान से पहले ये बात जरूर ध्यान रखें

मुंबई, 15 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में गुरुवार को 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान चल रहा है। मतदान से पहले फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने आमजन से वोट डालने से पहले कुछ बातों पर गौर करने की सलाह दी।

इंस्टाग्राम अकाउंट पर किए पोस्ट में उन्होंने मतदाताओं को जागरूक करते लिखा कि वोट देने से पहले इस बात पर गौर करें कि मुंबई में दुनिया का सबसे कम पब्लिक ओपन स्पेस हैं। ऐसे में मतदाताओं को पांच बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

विवेक रंजन अग्निहोत्री के अनुसार, मुंबई में औसतन हर व्यक्ति को सिर्फ 1-1.3 वर्ग मीटर पब्लिक ओपन स्पेस मिल पाता है। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक हर व्यक्ति के लिए कम से कम 9 वर्ग मीटर ओपन स्पेस होना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाएं भी यही न्यूनतम सिफारिश करती हैं, ताकि शहरवासियों को पर्याप्त हरी-भरी जगह, ताजी हवा और मनोरंजन मिल सके।

तुलना करें तो लंदन में प्रति व्यक्ति लगभग 31-32 वर्ग मीटर और न्यूयॉर्क में करीब 26-27 वर्ग मीटर पब्लिक ओपन स्पेस उपलब्ध है। इन शहरों में पार्क, गार्डन और खेल के मैदान निवासियों की सेहत, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वहीं, मुंबई में कुल जमीन का सिर्फ 3-6 प्रतिशत हिस्सा ही वास्तव में पार्क, गार्डन और प्लेग्राउंड के लिए आरक्षित है। बाकी जगहों पर अतिक्रमण, निर्माण और अन्य उपयोगों के कारण सुलभ हरी जगहें और कम हो रही हैं।

विवेक रंजन ने सवाल उठाया कि क्या कोई उम्मीदवार मुंबई में ज्यादा खुली जगहें बनाने, प्रदूषण कम करने और मौजूदा ओपन स्पेस की रक्षा का ठोस वादा कर रहा है? उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे ऐसे कैंडिडेट को चुनें जो शहर को ज्यादा हरा-भरा, स्वस्थ और रहने लायक बनाने की दिशा में काम करें। मुंबई की जनसंख्या वृद्धि और घनी आबादी के कारण ओपन स्पेस की कमी से निवासियों को कई समस्याएं– जैसे प्रदूषण बढ़ना, तनाव, बच्चों के खेलने की जगह न होना और समग्र जीवन गुणवत्ता में गिरावट झेलनी पड़ रही हैं।

--आईएएनएस

एमटी/वीसी

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