'मिशन 360' पर भाजपा का फोकस: संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज, वीडियो में जाने बड़े संवैधानिक बदलावों की तैयारी
संसद में बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपना राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है। पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार इन दिनों 'मिशन 360' पर काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य लोकसभा में दो-तिहाई यानी सुपर मेजोरिटी का आंकड़ा हासिल करना है। भाजपा का मानना है कि मजबूत बहुमत मिलने से कई अहम विधेयकों और सुधारों को आसानी से पारित कराया जा सकेगा।
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के बाद तेज हुई रणनीति
सूत्रों के अनुसार, 17 अप्रैल को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक पर लोकसभा में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद भाजपा ने अपनी संसदीय रणनीति को और आक्रामक बना दिया। इसी के बाद पार्टी ने संसद में संख्या बल बढ़ाने और दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए।
सिर्फ एक विधेयक नहीं, कई बड़े बदलाव हैं लक्ष्य
भाजपा का फोकस केवल महिला आरक्षण या परिसीमन से जुड़े विधेयकों तक सीमित नहीं है। पार्टी भविष्य में 'एक देश-एक चुनाव', न्यायिक सुधारों और अन्य बड़े संवैधानिक बदलावों से जुड़े प्रस्तावों को भी आगे बढ़ाना चाहती है। ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।
बहुमत के लिए कई मोर्चों पर काम
'मिशन 360' के तहत भाजपा कई स्तरों पर रणनीति बना रही है। इसमें विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं को अपने पक्ष में लाने, नए सहयोगी दलों को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से जोड़ने और जरूरत पड़ने पर महत्वपूर्ण मतदान के दौरान विपक्ष की संख्या कम होने की संभावनाओं पर भी नजर रखी जा रही है।पार्टी का लक्ष्य संसद में अपने समर्थन का दायरा इतना मजबूत करना है कि संवैधानिक संशोधनों के समय किसी तरह की संख्या संबंधी चुनौती सामने न आए।
मानसून सत्र तक लक्ष्य हासिल करने की कोशिश
भाजपा की कोशिश है कि संसद के मानसून सत्र तक अपनी राजनीतिक और संसदीय रणनीति को अंतिम रूप दे दिया जाए। इसके लिए संगठन और संसदीय दल दोनों स्तरों पर लगातार मंथन चल रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से 'मिशन 360' को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सफल रहती है, तो आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और चुनावी सुधारों पर तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है।

