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भाजपा को शासन नहीं, खुद की सत्ता प्यारी है : गौरव गोगोई

गुवाहाटी, 10 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पद पर रहते हुए 12 वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा का ध्यान जनता की सेवा से ज्यादा अपनी सत्ता को मजबूत करने पर है।
भाजपा को शासन नहीं, खुद की सत्ता प्यारी है : गौरव गोगोई

गुवाहाटी, 10 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पद पर रहते हुए 12 वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा का ध्यान जनता की सेवा से ज्यादा अपनी सत्ता को मजबूत करने पर है।

गौरव गोगोई ने आईएएनएस से कहा कि किसी भी सरकार का मुख्य उद्देश्य जनता की भलाई, रोजगार सृजन और विकास की नीतियां बनाना होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद भी भाजपा जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय विपक्षी दलों को कमजोर करने में लगी हुई है।

गौरव गोगोई ने कहा, "सरकार बनने के बाद मंत्रियों को जिम्मेदारियां देनी चाहिए, उन्हें काम सौंपना चाहिए, रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए, नई नीतियां बनानी चाहिए और बजट के माध्यम से विकास की दिशा तय करनी चाहिए। लेकिन भाजपा इन कामों को छोड़कर विपक्ष को कमजोर करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने में व्यस्त दिखाई देती है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र की भावना को कमजोर करना चाहती है। भाजपा को शासन से अधिक खुद की सत्ता की चिंता है। देश के लोग आज कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब कम होंगी। युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोजगार है। यदि देश में पर्याप्त नौकरियां नहीं मिलेंगी तो क्या उन्हें रोजगार के लिए विदेश जाना पड़ेगा?

गौरव गोगोई ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उन्हें भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीटें नहीं मिल रही हैं।

उन्होंने आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि व्यापारी रुपए की गिरती कीमत पर नजर रखे हुए हैं और सोच रहे हैं कि यह आगे कितना कमजोर होगा। वहीं, निवेशक भी यह विचार कर रहे हैं कि भारत में निवेश करना बेहतर होगा या किसी दूसरे देश में। धनी लोग भी विभिन्न कारणों से विदेशों में बसने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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