राजस्थान के टोंक जिले में बनास नदी पर बना बीसलपुर बांध जयपुर, अजमेर और टोंक के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलस्रोत है। वर्ष 2025 के मानसून में इस बांध ने भराव को लेकर नया रिकॉर्ड बनाया। बांध के इतिहास में पहली बार जुलाई में ही जलस्तर पूर्ण भराव स्तर 315.50 RL मीटर तक पहुंच गया। इससे पहले बांध के गेट अगस्त या सितंबर में ही खोले जाते रहे थे।
इससे पहले जुलाई के दौरान बांध का जलस्तर कभी इस स्तर तक नहीं पहुंचा था। लगातार बारिश और कैचमेंट क्षेत्र से आए भारी पानी के कारण बांध में तेजी से पानी की आवक हुई। त्रिवेणी नदी, जो बीसलपुर बांध के लिए प्रमुख जलस्रोत है, में भी तेज बहाव रहा। इसके अलावा चित्तौड़गढ़, अजमेर, राजसमंद और भीलवाड़ा सहित आसपास के जिलों में हुई अच्छी बारिश का असर बांध के जलस्तर पर पड़ा।
जब जलस्तर 315.50 RL मीटर पर पहुंचा तो बांध प्रशासन ने अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए गेट खोला। रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में एक गेट से करीब 6 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जरूरत के अनुसार अन्य गेट खोलने की तैयारी भी रखी गई थी।
बीसलपुर बांध का निर्माण 1990 के दशक में हुआ था और यह परियोजना 1999 में पूरी हुई। बांध की लंबाई करीब 574 मीटर और अधिकतम ऊंचाई लगभग 38.5 मीटर है। इसकी कुल जल भंडारण क्षमता करीब 1,095.84 मिलियन घन मीटर है।
बांध के भरने का सीधा फायदा राजस्थान के बड़े हिस्से को मिलता है। बीसलपुर से जयपुर, अजमेर और टोंक को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है, जबकि सिंचाई के लिए भी इसका पानी महत्वपूर्ण है। पिछले वर्षों में बांध के पानी से टोंक क्षेत्र में करीब 80 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिला है।
बीसलपुर बांध को जयपुर की लाइफलाइन भी कहा जाता है। बांध के पूरी क्षमता तक भरने का अर्थ है कि राजधानी समेत आसपास के इलाकों के लिए पेयजल सुरक्षा मजबूत होना। 2025 में लगातार दूसरी बार बांध के पूरी तरह भरने से जल संसाधन विभाग और स्थानीय लोगों में भी राहत देखने को मिली।सबसे खास बात: बीसलपुर बांध के इतिहास में पहले कई बार अगस्त और सितंबर में गेट खोले गए, लेकिन 2025 में पहली बार जुलाई में ही बांध ओवरफ्लो हुआ। यही इस रिकॉर्ड की सबसे बड़ी खासियत रही।

