बिहार विधानसभा में उठे शिक्षा और विकास के मुद्दे, सरकार ने समाधान का दिया आश्वासन
पटना, 21 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंत्रियों और विधायकों ने शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की ट्रांसफर नीति, स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं की कमी तथा विधायकों के लिए विकास निधि जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
भाजपा विधायक देवेश कांत सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार स्किल डेवलपमेंट को लेकर पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में कुछ लोगों द्वारा रुकावटें पैदा की जा रही थीं या फिर व्यवस्था में कुछ खामियां सामने आ रही थीं। उन्होंने इन सभी मामलों को सरकार के संज्ञान में लाया है। देवेश कांत ने कहा कि सरकार की ओर से मिले जवाब से वह संतुष्ट हैं और उन्हें विश्वास है कि इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए मंत्री संजय कुमार सिंह ने आईएएनएए से कहा कि समय-समय पर सरकारी नियमों में बदलाव होते रहते हैं और जनप्रतिनिधियों का अपनी मांगों और समस्याओं को सदन में उठाना पूरी तरह उचित है। उन्होंने कहा कि यदि सदस्य अपनी चिंताओं को सदन में नहीं रखेंगे तो उनका समाधान संभव नहीं होगा। सरकार अपने सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुनती है और उन्हीं के आधार पर निर्णय लेती है। उन्होंने भरोसा जताया कि जिन मुद्दों को माननीय सदस्यों ने उठाया है, उन पर सरकार निश्चित रूप से विचार करेगी।
मंत्री संजय कुमार सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि का भी जिक्र किया। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि कई बार 15 लाख रुपये की निर्धारित राशि में केवल आंशिक कार्य ही पूरा हो पाता है, जिसके कारण आगे का काम रुक जाता है। इसका खामियाजा संबंधित जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि जनता उनसे जवाब मांगती है। ऐसे में विधायकों द्वारा इन समस्याओं को सदन में उठाना आवश्यक है, ताकि सरकार वस्तुस्थिति को समझते हुए आवश्यक निर्णय ले सके।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने आईएएनएए से बातचीत के दौरान राज्य के स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले कई सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध कराए थे और कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था भी की थी, लेकिन वर्तमान में अधिकांश कंप्यूटर अनुपयोगी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है और ऐसे समय में स्कूलों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी है। तिवारी ने बताया कि उन्होंने यह मुद्दा सरकार के समक्ष उठाया है और संबंधित मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि कंप्यूटर शिक्षा को बेहतर बनाया जाएगा। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में एआई आधारित शिक्षा शुरू करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
शिक्षकों की ट्रांसफर नीति को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार इसे निश्चित रूप से लागू करेगी। उन्होंने बताया कि इसी महीने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को शिक्षकों की नई भर्ती के लिए अनुरोध भेजा जाएगा। राज्य सरकार आवश्यकता के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति करेगी, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास पर मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार उन सभी स्कूलों की सूची तैयार कर रही है जिनके पास अपनी जमीन या भवन नहीं है। सूची तैयार होने के बाद वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर ऐसे सभी विद्यालयों के लिए भवन निर्माण का कार्य चरणबद्ध तरीके से कराया जाएगा, जिससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
कंप्यूटर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि 15 अगस्त तक राज्य के उन सभी हाई स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी, जहां कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना और डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
--आईएएनएस
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