Samachar Nama
×

बिहार : राहुल राज और वंशीधर ब्रजवासी की विधान परिषद की सदस्यता रद्द करने की मांग, राजद ने सभापति को सौंपा ज्ञापन

बिहार : राहुल राज और वंशीधर ब्रजवासी की विधान परिषद की सदस्यता रद्द करने की मांग, राजद ने सभापति को सौंपा ज्ञापन
बिहार : राहुल राज और वंशीधर ब्रजवासी की विधान परिषद की सदस्यता रद्द करने की मांग, राजद ने सभापति को सौंपा ज्ञापन

पटना, 4 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद चुनाव में हाल ही में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को समर्थन देने के मामले को लेकर राजद ने मोर्चा खोल दिया है। नव निर्वाचित वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बुधवार को विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय को ज्ञापन सौंपा।

राजद के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने दोनों विधान पार्षदों को संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करने और उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि दोनों सदस्यों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने के बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है, जो दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के विपरीत है।

ज्ञापन के अनुसार, बिहार विधान परिषद के तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से वंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. राहुल राज स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए थे। निर्वाचन संबंधी आधिकारिक अभिलेखों में दोनों की स्थिति निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दर्ज है। इसके बाद दोनों सदस्यों द्वारा भाजपा की सदस्यता ग्रहण किए जाने की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई है।

राजद ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) का हवाला देते हुए कहा है कि स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित कोई सदस्य यदि चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है, तो वह सदन का सदस्य बने रहने के लिए अयोग्य हो जाता है। पार्टी ने इस प्रावधान के तहत दोनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 191(2) और 10वीं अनुसूची के पैरा 6(1) का भी उल्लेख किया गया है।

इसके अनुसार, अयोग्यता से संबंधित प्रश्न पर निर्णय लेने का अधिकार संबंधित सदन के सभापति को है। राजद ने बिहार विधान परिषद के सभापति से इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लेने का आग्रह किया है। राजद ने अपने ज्ञापन में बिहार विधान परिषद सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1994 और सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का भी उल्लेख किया है। पार्टी ने दोनों सदस्यों के निर्वाचन संबंधी अभिलेखों, भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के प्रमाणों और संबंधित समाचार रिपोर्टों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों के राजनीतिक निर्णय का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जनादेश, संवैधानिक मर्यादा और दल-बदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता से जुड़ा है। राजद ने मांग की है कि दोनों सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई बिना अनावश्यक विलंब के पूरी की जाए और याचिकाकर्ताओं को अंतिम निर्णय की लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

--आईएएनएस

एमएनपी/एसके

Share this story