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बिहार : निर्दलीय एमएलसी के भाजपा के समर्थन से सियासत गरमाई, आनंद पुष्कर ने गठबंधन धर्म पर उठाए सवाल

बिहार : निर्दलीय एमएलसी के भाजपा के समर्थन से सियासत गरमाई, आनंद पुष्कर ने गठबंधन धर्म पर उठाए सवाल
बिहार : निर्दलीय एमएलसी के भाजपा के समर्थन से सियासत गरमाई, आनंद पुष्कर ने गठबंधन धर्म पर उठाए सवाल

पटना, 1 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय जीत दर्ज करने वाले राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा के समर्थन दिए जाने के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। इस घटनाक्रम को लेकर एनडीए समर्थित जदयू के प्रत्याशी आनंद पुष्कर ने भाजपा के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि राजद अध्यक्ष लालू यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने इसे जनादेश के साथ धोखा करार दिया है।

हाल ही में बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को पराजित किया था। वहीं, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार अभिषेक झा को हराकर जीत दर्ज की थी। शनिवार को दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षद भाजपा कार्यालय में आयोजित विधानमंडल दल की बैठक में शामिल हुए।

बैठक से पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों का स्वागत और सम्मान किया तथा भाजपा का पट्टा पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। इसके बाद आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर भाजपा के कुछ नेताओं पर गठबंधन धर्म का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने सांसद राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अपने चुनाव में समर्थन लेने की बात आती है, तब नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया जाता है, लेकिन सहयोगी दल के प्रत्याशी के साथ खड़े होने की बारी आने पर गठबंधन धर्म की मर्यादा कहां चली जाती है।

पुष्कर ने कहा कि वह वर्षों से जदयू के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने अपने पिता केदारनाथ पांडेय के शिक्षक समाज के लिए किए गए योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक इतिहास और संगठनात्मक समर्पण पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उन्हें लगातार यह आश्वासन दिया जाता रहा कि वर्तमान विधान पार्षद को चुनाव लड़ने से रोक लिया जाएगा, लेकिन अंततः वे निर्दलीय मैदान में उतर गए।

अब उन्हें भाजपा में शामिल कराए जाने से गठबंधन के साथियों को अंधेरे में रखने को लेकर सवाल खड़े होते हैं। पुष्कर ने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए की बैठक में शिक्षकों के बीच जाकर समर्थन जुटाने का निर्णय लिया गया था लेकिन भाजपा के कई सांसदों और विधायकों ने अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि यह केवल उनके चुनाव की नहीं, बल्कि गठबंधन में समर्पित कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात है।

उधर, रोहिणी आचार्य ने रविवार को एक्स पर लिखा, “जनादेश की पीठ में खंजर, स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा।” उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनकर भेजा था, लेकिन जीत के बाद उनका भाजपा के साथ जाना जनादेश के साथ सीधा धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं के लिए निजी और राजनीतिक स्वार्थ सर्वोपरि है। इस घटनाक्रम ने बिहार में एनडीए के भीतर आपसी समन्वय और गठबंधन धर्म को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

--आईएएनएस

एमएनपी/पीएम

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