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बिहार: मुजफ्फरपुर में अंतरराष्ट्रीय डेटा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, यूपी-बिहार के चार लोग गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो आम भारतीय नागरिकों की निजी जानकारियां विदेशी अपराधियों को बेच रहा था। इस मामले में पुलिस ने यूपी और बिहार के चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
बिहार: मुजफ्फरपुर में अंतरराष्ट्रीय डेटा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, यूपी-बिहार के चार लोग गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो आम भारतीय नागरिकों की निजी जानकारियां विदेशी अपराधियों को बेच रहा था। इस मामले में पुलिस ने यूपी और बिहार के चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस का दावा है कि इस गिरोह में अन्य कई लोग भी शामिल हो सकते हैं। आरोप है कि इस गिरोह में शामिल लोग अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों, फर्जी एपीआई और टेलीग्राम बॉट्स का सहारा लेकर लोगों की गोपनीयता भंग करते हुए उनके निजी जानकारियों को शेयर करते थे।

मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने बुधवार को बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि अहियापुर थाना क्षेत्र के ऋषभ कुमार अवैध तरीके से एपीआई बनाकर डेटा बेच रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर साइबर डीएसपी के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। इसमें बिहार एसटीएफ, जिला आसूचना इकाई और साइबर थाना की तकनीकी टीम को शामिल किया गया।

पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ऋषभ कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उसके तीन अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया, जो इस नेटवर्क से जुड़े थे। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार लोगों में अहियापुर निवासी ऋषभ कुमार के अलावा गाजीपुर (यूपी) का दीपक चौधरी उर्फ आशु कुमार, दरभंगा का सुधांशु कुमार और मुजफ्फरपुर के हथौड़ी का साहिल कुमार शामिल हैं।

एसएसपी मिश्रा ने बताया कि जांच में जो तथ्य अब तक सामने आए हैं, उसके मुताबिक, ये लोग फर्जी सिम कार्ड और टेलीग्राम बॉट्स का इस्तेमाल करते थे। आरोपी अवैध रूप से एपीआई तैयार करते थे, जिसके जरिए वे सरकारी और निजी डेटाबेस तक अनधिकृत पहुंच बनाते थे। इनके पास से बरामद मोबाइल और आईपैड की जांच में पाया गया कि ये गिरोह लोगों के मोबाइल नंबर और आईएमईआई डिटेल्स, आधार कार्ड और पैन कार्ड की जानकारी, वाहनों के रजिस्ट्रेशन और स्वामियों के विवरण तथा बैंक खातों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां भेजते थे।

आरोपियों के फोन में विदेशी साइबर गिरोहों के साथ की गई चैटिंग के पुख्ता सबूत मिले हैं। जांच में कई संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप और चैनल संचालित होने का पता चला है। साथ ही, मुख्य आरोपी ऋषभ कुमार से जुड़े बैंक खातों में मौजूद करीब चार लाख रुपए को फ्रीज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अभी इसकी और जांच की जा रही है।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

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