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बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ा, गंगा-कोसी-गंडक और सोन में उफान, प्रशासन अलर्ट

बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ा, गंगा-कोसी-गंडक और सोन में उफान, प्रशासन अलर्ट
बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ा, गंगा-कोसी-गंडक और सोन में उफान, प्रशासन अलर्ट

पटना, 1 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में गंगा, कोसी, गंडक और सोन समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि के बीच जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। भागलपुर में गंगा के तेज प्रवाह से कटाव की स्थिति बनी हुई है, जबकि बक्सर में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मंगलवार दोपहर की रिपोर्ट के अनुसार, वीरपुर बैराज पर कोसी नदी का डाउनस्ट्रीम प्रवाह 1,92,735 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो बढ़ रहा था। वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक नदी का प्रवाह 1,50,200 क्यूसेक रहा और इसमें भी वृद्धि दर्ज की गई। इंद्रपुरी बैराज पर सोन नदी का डाउनस्ट्रीम प्रवाह 4,25,854 क्यूसेक तक पहुंच गया। इससे नदियों से जुड़े निचले और तटवर्ती इलाकों में प्रशासन की चिंता बढ़ी है।

गंगा नदी का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है। पटना के गांधी घाट में जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया और अगले दिन सुबह तक इसमें 20 सेंटीमीटर की वृद्धि की संभावना जताई गई है। हाथीदह में जलस्तर खतरे के निशान से 48 सेंटीमीटर ऊपर था और 22 सेंटीमीटर वृद्धि की संभावना है। मनेर में जलस्तर 15 सेंटीमीटर ऊपर था, जहां 31 सेंटीमीटर तक वृद्धि का अनुमान है।

वहीं, बक्सर में जलस्तर खतरे के निशान से 34 सेंटीमीटर नीचे था और अगले दिन दोपहर तक 17 सेंटीमीटर बढ़ने की संभावना जताई गई है। बक्सर में जिला पदाधिकारी साहिला ने गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के मद्देनजर लाल सिंह का डेरा क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों और संभावित बाढ़ की स्थिति का जायजा लेते हुए सिमरी के अंचलाधिकारी को आबादी वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नाव, नाविक और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही नदी के जलस्तर और आसपास के क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने तथा आपात स्थिति के लिए सभी संसाधन तैयार रखने को कहा।

भागलपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर और नदी की धारा में बदलाव से कटाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। काजीकोरेया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर कटाव से सुरक्षा के लिए युद्धस्तर पर सुरक्षात्मक कार्य जारी हैं। जल संसाधन विभाग ने पर्याप्त संख्या में अभियंताओं और श्रमिकों के साथ मशीनरी एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए हैं और दिन-रात काम कराया जा रहा है। महादेवपुर बांध के समीप तेज धारा और स्कॉरिंग के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बांध के बड़े हिस्से को सुरक्षात्मक कार्यों से सुरक्षित किया गया है, लेकिन कटाव का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय जानकारी के अनुसार कुछ पुरानी संरचनाएं प्रभावित हुई हैं और एक मंदिर भी कटाव की चपेट में आया है। संबंधित विभागों की टीमें लगातार निगरानी कर आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं। भागलपुर प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था भी मजबूत की है। मध्य विद्यालय, शंकरपुर, नाथनगर में मंगलवार रात सामुदायिक रसोई शुरू की जा रही है। इसके अलावा चार स्थानों पर पहले से सामुदायिक रसोई संचालित हैं।

जरूरत के अनुसार राहत शिविर और सामुदायिक रसोई बढ़ाई जाएंगी। गणेश बासा, साहू ईंट भट्ठा, जानवी चौक में राहत शिविर की व्यवस्था की जा रही है, जहां भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासन ने लोगों से नदी और जलमग्न क्षेत्रों के पास अनावश्यक रूप से नहीं जाने, अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

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