बिहार में बाढ़ की स्थिति भयावह, एयर ड्रॉप से खाना पहुंचाना जरूरी : श्याम रजक
पटना, 7 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार चिंता बढ़ा रही है। कई जगह सड़कें कट जाने से गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इस बीच जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के हालात को बेहद भयावह बताते हुए सरकार से राहत कार्य तेज करने और प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुंचाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सड़कें कट गई हैं और आने-जाने का कोई रास्ता नहीं बचा है, वहां अब एयर ड्रॉप के जरिए खाना पहुंचाना बेहद जरूरी हो गया है।
श्याम रजक ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि जगह-जगह रास्ते कट चुके हैं और लोगों को तत्काल राहत की जरूरत है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के पास भी संसाधनों की कमी है लेकिन जितने संसाधन उपलब्ध हैं, उनका इस्तेमाल अधिकारी पूरी क्षमता के साथ कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए इंजीनियरों, निर्माण सामग्री और दूसरे जरूरी संसाधनों की और जरूरत है।
उन्होंने बताया कि करीब 16-17 गांव ऐसे हैं, जहां लोग सड़क संपर्क टूटने के कारण बुरी तरह प्रभावित हैं। ऐसे में लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आने-जाने और जरूरी सामान पहुंचाने की है। फिलहाल कई प्रभावित इलाकों में आने-जाने का एकमात्र साधन नाव है, लेकिन नावों की संख्या जरूरत के मुकाबले काफी कम है। कुछ स्थानों पर अभी दो नाव ही उपलब्ध हैं। अधिकारियों की ओर से और नाव उपलब्ध कराने की बात कही गई है लेकिन उनके मुताबिक हालात को देखते हुए कम से कम 25 से 30 नावों की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जब सड़क से प्रभावित गांवों तक पहुंचना संभव नहीं है और नावें भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं, तो वहां लोगों के लिए भोजन पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में एयर ड्रॉप के जरिए खाने-पीने का सामान पहुंचाना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते प्रभावित लोगों तक भोजन और दूसरी जरूरी राहत सामग्री नहीं पहुंची, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
श्याम रजक ने अपने क्षेत्र में तीन बच्चियों की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन मौतों के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में भी तेजी लाने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पोस्टमार्टम की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रखी जाए और अलग-अलग शिफ्ट में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाए, ताकि शवों का पोस्टमार्टम जल्द हो सके और परिवार अंतिम संस्कार कर सकें। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से घोषित सहायता का लाभ भी प्रभावित परिवारों को जल्द मिलना चाहिए।
वहीं, बाढ़ को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों पर श्याम रजक ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि घर में बैठकर भाषण देना आसान है लेकिन आपदा के समय जनता के बीच जाकर खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए या नहीं, यह अलग विषय है लेकिन राज्य सरकार अपने स्तर पर काम कर रही है।
श्याम रजक ने नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि वे सिर्फ बयानबाजी करने के बजाय बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच जाएं। चुनाव और राजनीति के समय जनता के साथ खड़े होने की बात करने वाले नेताओं को इस मुश्किल समय में भी लोगों के बीच रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसी आपदा में सरकार अकेले सब कुछ नहीं कर सकती। समाज के सभी लोगों, व्यापारिक संगठनों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और सभी राजनीतिक दलों को मिलकर राहत कार्य में योगदान देना चाहिए। उन्होंने संपन्न लोगों से भी अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार संसाधन निकालकर बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाएं।
दिल्ली में हुए बिल्डिंग हादसे को लेकर पूछे गए सवाल पर श्याम रजक ने कहा कि उन्हें जानकारी है कि सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह की दो राय नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पटना में भी कई ऐसी इमारतें हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं। उन्होंने अनिसाबाद, यारपुर, कन्हैया नगर और छेदी टोला जैसे इलाकों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगह पुराने और जर्जर मकानों में लोग रहने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों से ऐसे इलाकों पर ध्यान देने का आग्रह किया है। जर्जर मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले गरीब और दलित परिवारों को चिन्हित कर उनके लिए सुरक्षित अपार्टमेंट बनाए जाने चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर और सुरक्षित आवास मिल सके।
मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े कथित शुद्धिकरण विवाद पर श्याम रजक ने कहा कि छुआछूत जैसे गंभीर मुद्दे केवल राजनीति से खत्म नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी दलित समाज को छुआछूत का दंश झेलना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि खड़गे देश के बड़े नेता हैं, इसलिए उनके साथ हुई घटना चर्चा में आ गई लेकिन गांवों और छोटे इलाकों में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव पर भी ध्यान देने की जरूरत है। सिर्फ कानून बना देने से छुआछूत खत्म नहीं होगी बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना होगा।
श्याम रजक ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की बात का हवाला देते हुए कहा कि संविधान तभी प्रभावी होगा, जब उसे जमीन पर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर समाज में चेतना नहीं आएगी और लोग बराबरी के अधिकार को स्वीकार नहीं करेंगे, तो कानून के बावजूद छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयां बनी रहेंगी।
--आईएएनएस
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