बिहार में बाढ़ : पप्पू यादव का सरकार पर हमला, बोले-गाद नासा ने नहीं, बिहार की व्यवस्था ने जमा की
पटना, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार में बाढ़ और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर होने वाले खर्च को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ के स्थायी समाधान के बजाय हर साल राहत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
पटना में सोमवार को एक प्रेस वार्ता में पप्पू यादव ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के कथित बयान पर तंज कसते हुए कहा कि यदि बिहार में बारिश और बाढ़ के लिए नासा जिम्मेदार है, तो नदियों में जमा गाद के लिए भी नासा ही जिम्मेदार होगा। उन्होंने सवाल किया कि एंटी-इरोशन के नाम पर एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं तो क्या वह पैसा भी नासा लेकर चला गया?
उन्होंने कहा कि 1990 से अब तक बिहार में जाति, धर्म और मजहब के नाम पर खुली लूट हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल एक ही स्थान पर बांध क्यों टूटता है और बार-बार उसी ठेकेदार को काम क्यों दिया जाता है। उन्होंने नेताओं, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि बाढ़ बिहार के लिए नासूर बन चुकी है और इस साल तीन बार बाढ़ की स्थिति बनी है। सांसद ने कहा कि फरक्का संधि दिसंबर में समाप्त हो रही है, लेकिन बिहार की बाढ़ समस्या को लेकर गंभीर पहल नहीं हो रही है।
उन्होंने सवाल किया कि असम, पंजाब और नेपाल को मदद मिलती है, लेकिन बिहार को क्यों नहीं। उन्होंने दावा किया कि 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर 1,000 करोड़ रुपए दिए थे, जबकि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5,000 करोड़ रुपए की घोषणा की थी, लेकिन उनके अनुसार बिहार को राशि नहीं मिली। पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा हिंदू-मुसलमान करती है, लेकिन बाढ़ आने पर उसका हिंदुत्व डूब जाता है। इसी तरह विपक्ष चुनाव में जाति की राजनीति करता है, लेकिन बाढ़ में उसकी जाति भी डूब जाती है।
उन्होंने सांसदों और विधायकों पर भी बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेता चुनाव के समय हेलीकॉप्टर से जनता के बीच पहुंचते हैं, लेकिन आपदा के समय उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने छपरा और नौतन में करीब 60 लाख रुपए की सहायता दी है और टूटे घरों के लिए 10 से 25 हजार रुपए तक की मदद की है। उन्होंने सवाल किया कि जिन सांसदों के पास पर्याप्त संसाधन हैं, उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या किया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वह इस संबंध में करीब 50 पत्र लिख चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि 1990 के बाद बिहार में रहे सिंचाई मंत्रियों और अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए।
--आईएएनएस
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