बिहार में आठ भ्रष्ट अधिकारियों की 4.14 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया तेज
पटना, 5 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। निगरानी से प्राप्त तथ्यों के आधार पर वर्ष 2025 में आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की करीब 4.14 करोड़ रुपए की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को राज्यसात किए जाने का प्रस्ताव संबंधित सक्षम प्राधिकारी को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही इन संपत्तियों को सरकार के अधीन लेने की औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने सोमवार को बताया कि जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी, एक टैक्स दारोगा और एक सीडीपीओ शामिल हैं। इन सभी के विरुद्ध वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए थे।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अब तक 119 मामलों में 96.76 करोड़ रुपए की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें से 66 मामले (57 करोड़ रुपए) सक्षम प्राधिकारी की अदालत में लंबित हैं, जबकि 32 मामले (20.80 करोड़ रुपए) उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। दो मामले सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के रूप में दर्ज हैं और दो मामलों में विपक्षी पक्ष की अपील के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।
निगरानी के मुताबिक, अब तक 11 मामलों में 6.03 करोड़ रुपए की संपत्तियां अंतिम रूप से राज्यसात की जा चुकी हैं। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राज्यसात करने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। वर्ष 2025 में आठ मामलों में प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी को सौंपा गया है और शीघ्र ही इन पर निर्णय की उम्मीद है।
बता दें कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने को लेकर लगातार अभियान चला रही है। इसके तहत रिश्वत लेते अधिकारियों को रंगेहाथ गिरफ्तार कर रही है।
--आईएएनएस
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