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बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने भागलपुर के रामासी गांव को बनाया देश का पहला 'सिंदूर ग्राम'

बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने भागलपुर के रामासी गांव को बनाया देश का पहला 'सिंदूर ग्राम'
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने भागलपुर के रामासी गांव को बनाया देश का पहला 'सिंदूर ग्राम'

भागलपुर, 18 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार का बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने भागलपुर जिले के रामासी गांव को भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम' घोषित करते हुए इसे गोद लिया है। विश्वविद्यालय ने इस पहल को ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

कार्यक्रम का नेतृत्व कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने किया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, महिला किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान एक एकड़ भूमि में सात से आठ माह आयु के 250 सीता सिंदूर पौधों का रोपण किया गया। साथ ही 100 महिला किसानों के बीच सिंदूर के पौधों का वितरण किया गया। किसानों को हॉर्टिकल्चर टूल किट, पावर नैपसैक स्प्रेयर और स्वीपिंग मशीन भी उपलब्ध कराई गई, ताकि उनकी आजीविका को मजबूत किया जा सके।

मुख्य अतिथि सन्हौला के विधायक सुभानंद मुकेश और रामासी पंचायत की मुखिया शोभा देवी ने इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रवि केशरी ने सीता सिंदूर के धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए की। उन्होंने कहा कि सिंदूर केवल सुहाग का प्रतीक नहीं, बल्कि प्राकृतिक रंग और अन्य औद्योगिक उत्पादों के रूप में भी इसकी बड़ी उपयोगिता है।

कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने कहा कि अब रामासी गांव की पहचान 'सिंदूर ग्राम' के रूप में होगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. वी. शाजीदा बानो के तीन वर्षों के प्रयासों से सीता सिंदूर की तकनीक को प्रयोगशाला से किसानों के खेतों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय ने सिंदूर प्रौद्योगिकी का पेटेंट तथा सीता सिंदूर का जीआई टैग हासिल कर महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराएगा तथा गांव में सिंदूर प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर बीज से शुद्ध सिंदूर पाउडर तैयार करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने बताया कि एनाट्टो का उपयोग अमूल सहित खाद्य उद्योगों में प्राकृतिक रंग के रूप में किया जाता है, जबकि बिक्सिन ऑयल के औद्योगिक उपयोग भी व्यापक हैं।

कुलपति ने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि रामासी में सिंदूर नर्सरी, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और कुक्कुट पालन जैसी एकीकृत गतिविधियां शुरू की जाएंगी। इसके अलावा जरदालू गांव और कमलम गांव जैसी थीम आधारित ग्राम विकास योजनाओं पर भी काम होगा। उन्होंने दानापुर कैंटोनमेंट क्षेत्र में विश्व का पहला 'सिंदूर पार्क' विकसित करने की योजना की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, महिला किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

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