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राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार : बिहार की पुष्पा प्रसाद और मध्य प्रदेश के शैलेंद्र प्रताप सिंह चयनित, बताया- 'सपने साकार हुए'

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार : बिहार की पुष्पा प्रसाद और मध्य प्रदेश के शैलेंद्र प्रताप सिंह चयनित, बताया- 'सपने साकार हुए'
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार : बिहार की पुष्पा प्रसाद और मध्य प्रदेश के शैलेंद्र प्रताप सिंह चयनित, बताया- 'सपने साकार हुए'

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के गोपालगंज में कुचायकोट की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें भारत की राष्ट्रपति और देश की प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मु शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर को सम्मानित करेंगी। इस सम्मान के लिए मध्य प्रदेश के सीधी से शैलेंद्र प्रताप सिंह को भी चयनित किया गया है।

राजकीय कन्या मध्य विद्यालय कुचायकोट के प्रधानाध्यापक वाल्मीकि प्रसाद ने कहा, "मैं पुरस्कार के लिए इतना जरूर कहूंगा कि इन्होंने विद्यालय के लिए एक शिक्षिका के रूप में नहीं बल्कि बच्चों के अभिभावक और मां की तरह पठन-पाठन, ड्रेस और उनकी गतिविधियों में पूर्ण रूप से योगदान दिया है। यहां के सभी शिक्षक, विद्यालय परिवार बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। खासतौर से स्टूडेंट्स अति पिछड़े क्षेत्र से आते हैं, उनके अभिभावक भी काफी खुश हैं। जिन घरों में आज तक शिक्षा की लौ तक नहीं जली थी, उन घरों में शिक्षिका ने लौ जलाने का प्रयास किया।"

उन्होंने कहा कि शिक्षिका ने अथक प्रयास किया है। इन्होंने एक अभिवंचित वर्ग के क्षेत्रों में जाकर ब्लैकबोर्ड का निर्माण किया। आर्थिक अभाव के कारण बच्चे कॉपी, पेंसिल नहीं खरीद पाते हैं, ऐसे में ये बच्चे ब्लैकबोर्ड पर अपना समय पढ़ने में लगाते हैं। इसमें उनकी माताएं और अभिभावक भी पूरा सहयोग करते हैं।

वहीं, शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने कहा, "सच बताऊं तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। जब लोगों की बधाइयों का सिलसिला शुरू हुआ, तब मुझे विश्वास हुआ कि ये सम्मान मुझे ही मिला है। सभी लोगों को बहुत-बहुत धन्यवाद। सपने साकार हुए, एक स्वर्णिम पल है। कहीं ना कहीं, खुली आंखों से सपना देखा था कि राष्ट्रपति जी, जिनको हम तस्वीरों में देखते हैं, मैं साक्षात जब मिलूंगी तो धन्य हो जाऊंगी।"

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाने में कई सारी चुनौतियां आईं। लेकिन, कहते हैं न सफलता जब मिल जाती है, तो इंसान चुनौतियां भूल जाता है। मैंने असफलताओं को साथ लेकर ही सफलता का मार्ग तय किया है। ग्रामीण परिवेश है, तो लोगों में शिक्षा की कमी होती है, तो उन्हें जागरूक करना, बच्चों से पहले उनके अभिभावक से मैंने बात की, उन्हें राजी किया, उन्हें शिक्षित किया कि अपने बच्चों को भेजिए। इसमें उन लोगों का सहयोग सौ फीसदी रहा है।

दूसरी ओर, शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, "ये केवल मेरा नहीं, पूरे सीधी जिला के शिक्षकों का सम्मान है। साथ ही यहां के बच्चों और अभिभावकों का भी सम्मान है। मैं 13 अगस्त को इस विद्यालय में आया। उस समय बच्चों की संख्या कुल 69 थी। 15 अगस्त को मैं ध्वजारोहण के लिए गया तो अभिभावकों से मैंने बात की। मैंने कहा कि मैं आपके बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता हूं। नतीजा ये निकला कि हमने लगभग 5 लाख रुपए जन सहयोग के माध्यम से इकट्ठा किया। फिर इस शाला भवन का जीर्णोद्धार कराया। इस समय छात्रों का नामांकन 202 है। इसमें छात्राओं की संख्या ज्यादा हैं। 202 में 107 बालिकाएं हैं। मेरे स्कूल से बच्चों का चयन सैनिक स्कूल और नवोदय विद्यालय में भी हुआ है।"

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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