Samachar Nama
×

बिहार की बावन बूटी, पत्थरकट्टी एवं पीढ़िया पेंटिंग को मिला जीआई टैग

पटना, 13 जून (आईएएनएस)। बिहार के तीन पारंपरिक उत्पादों, नालंदा का बावन बूटी, गया का पत्थरकट्टी एवं भोजपुर के पीढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिया गया है। यह उपलब्धि राज्य के शिल्पकारों, बुनकरों एवं ग्रामीण उत्पादक समुदायों के लिए गर्व का विषय बताया जा रहा है।
बिहार की बावन बूटी, पत्थरकट्टी एवं पीढ़िया पेंटिंग को मिला जीआई टैग

पटना, 13 जून (आईएएनएस)। बिहार के तीन पारंपरिक उत्पादों, नालंदा का बावन बूटी, गया का पत्थरकट्टी एवं भोजपुर के पीढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिया गया है। यह उपलब्धि राज्य के शिल्पकारों, बुनकरों एवं ग्रामीण उत्पादक समुदायों के लिए गर्व का विषय बताया जा रहा है।

बिहार में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि नाबार्ड तथा बिहार सरकार के संयुक्त प्रयासों से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक एवं हस्तशिल्प विरासत को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्टता, गुणवत्ता और भौगोलिक पहचान को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

नालंदा जिले की प्रसिद्ध बावन बूटी बिहार की प्राचीन बुनकरी परंपरा का एक अद्वितीय उदाहरण है। इस विशिष्ट वस्त्रकला में कपड़े पर 52 प्रकार के पारंपरिक बौद्ध एवं सांस्कृतिक प्रतीकों (बूटी) को हाथकरघे पर बुना जाता है। इस कला का विकास मुख्य रूप से बसवन बिगहा और आसपास के क्षेत्रों में हुआ, जहां पीढ़ियों से बुनकर परिवार इस परंपरा का संरक्षण करते आ रहे हैं।

इसी प्रकार, गयाजी जिले के पत्थरकट्टी गांव की पत्थर शिल्पकला लगभग 300 वर्षों से अपनी उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर स्थानीय काले ग्रेनाइट पत्थरों से भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, देवी-देवताओं तथा अन्य कलात्मक प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं।

यह भी माना जाता है कि विष्णुपद मंदिर के निर्माण में यहां के ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग किया गया था। वहीं, भोजपुर क्षेत्र की पिढ़िया पेंटिंग बिहार की लोक चित्रकला की एक विशिष्ट शैली है, जिसे मुख्यतः महिलाएं पारंपरिक पर्व-त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर बनाती रही हैं।

इस कला में प्राकृतिक रंगों एवं पारंपरिक प्रतीकों के माध्यम से लोक जीवन, पारिवारिक संबंधों, धार्मिक आस्थाओं तथा ग्रामीण संस्कृति का सजीव चित्रण किया जाता है। माना जा रहा है कि यह उपलब्धि 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे अभियानों को भी सशक्त बनाएगी।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

Share this story

Tags