बिहार: गयाजी में पांडुलिपि संरक्षण, डिजिटाइजेशन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले सम्मानित
गयाजी, 5 मई (आईएएनएस)। देश और दुनिया में ज्ञान स्थली के रूप में चर्चित बिहार के गयाजी जिले में ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को एक समारोह में जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया गया।
इस समारोह का उद्देश्य अन्य लोगों को इसके लिए प्रेरित करना है।
गयाजी के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा कि पूरे बिहार में गया जिला दूसरे स्थान पर पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन में कार्य कर रहा है। आप सभी ने अच्छा काम किया है, आप सभी से अन्य व्यक्ति भी प्रेरणा लेंगे और पांडुलिपि संरक्षण में बढ़-चढ़कर प्रशासन को सहयोग प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम जिले में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं उनके डिजिटलीकरण की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का एक महत्वपूर्ण चरण है। इस पहल के माध्यम से न केवल प्राचीन पांडुलिपियों को सुरक्षित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से डिजिटल स्वरूप में संरक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्ध भी कराया जा रहा है।
गयाजी जिला अंतर्गत विभिन्न प्रमुख स्थानों बोधगया मठ, मगध विश्वविद्यालय पुस्तकालय, समाहरणालय पुस्तकालय, जिला अभिलेखागार, अन्य सरकारी कार्यालयों तथा जिले के विभिन्न निजी व्यक्तियों के पास संरक्षित पांडुलिपियों का व्यापक सर्वेक्षण एवं सत्यापन कार्य संपन्न किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत कुल 1,21,938 पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। यह उपलब्धि जिले के समृद्ध ऐतिहासिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रशासन एवं समाज के संयुक्त प्रयासों को प्रतिबिंबित करती है।
इस अवसर पर पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन कार्य में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शंभूनाथ विट्ठल, राजेंद्र कुमार सिजुआर, चिंटू लाल झांगर, संजय कुमार उर्फ स्वामी सुदर्शन आचार्य महाराज सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों ने विभिन्न स्तरों पर सक्रिय सहभागिता निभाते हुए पांडुलिपियों के संकलन, सत्यापन एवं संरक्षण में सराहनीय भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, इस क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु सामूहिक भागीदारी को सुदृढ़ करना है।
समारोह में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, शोधकर्ता, साहित्यकार, अभिलेखागार विशेषज्ञ तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि यह आयोजन न केवल पांडुलिपियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह जिले की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को सहेजने एवं उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल भी है।
--आईएएनएस
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