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बिहार कैबिनेट ने खोला रोजगार और विकास का रास्ता, 22 हजार आंगनबाड़ी पदों पर होगी बहाली

बिहार कैबिनेट ने खोला रोजगार और विकास का रास्ता, 22 हजार आंगनबाड़ी पदों पर होगी बहाली
बिहार कैबिनेट ने खोला रोजगार और विकास का रास्ता, 22 हजार आंगनबाड़ी पदों पर होगी बहाली

पटना, 29 जुलाई (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के सामाजिक कल्याण, पेयजल, आधारभूत संरचना, कृषि, सहकारिता और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट ने समेकित बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) के अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका के 22 हजार से अधिक पदों पर बहाली का निर्णय लिया। इसके अलावा अमृत 2.0 मिशन के तहत दो शहरी जलापूर्ति परियोजनाओं, बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनर्जीवन, दो बड़े पुलों के निर्माण तथा वेजफेड को मजबूत करने सहित कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

कैबिनेट ने आईसीडीएस के तहत समेकित बाल विकास सेवाएं अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका चयन (संशोधन) मार्गदर्शिका-2026 को स्वीकृति प्रदान की। इसके तहत राज्य में लगभग 22 हजार पदों पर नई बहाली का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का मानना है कि इससे आंगनबाड़ी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा महिलाओं और बच्चों तक पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। बैठक में अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के तहत लखीसराय और किशनगंज जलापूर्ति परियोजनाओं को भी प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। लखीसराय जलापूर्ति योजना के लिए 150.96 करोड़ रुपए तथा किशनगंज जलापूर्ति योजना के लिए 53.71 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लाखों परिवारों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही दोनों शहरों में शहरी आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी और भविष्य की बढ़ती आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। मंत्रिमंडल ने मिथिलांचल के औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित बंद पड़ी चीनी मिल परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना तथा गन्ना उपोत्पाद आधारित उद्योग विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।

सरकार का मानना है कि इस पहल से गन्ना किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। बैठक में पथ निर्माण विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। जमुई जिले में एनएच-333ए के खैरा-सोनो मार्ग के 72वें किलोमीटर पर नरियाना घाट स्थित क्यूल नदी पर 93.82 करोड़ रुपए की लागत से नए उच्चस्तरीय आरसीसी पुल का निर्माण कराया जाएगा। वहीं, इसी मार्ग के 80वें किलोमीटर पर मंगोबंदर के समीप सुकनर नदी पर 55.96 करोड़ रुपए की लागत से दूसरा उच्चस्तरीय आरसीसी पुल बनाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इन दोनों पुलों के निर्माण से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा, वर्षभर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा तथा व्यापार, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सहकारिता विभाग के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल ने बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत वेजफेड की त्रि-स्तरीय सहकारी व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार के लिए 106.39 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी। इसके अंतर्गत प्रखंड स्तर पर आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी, सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी तथा सब्जियों के भंडारण एवं परिवहन के लिए रीफर वाहनों की व्यवस्था की जाएगी।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 45.50 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के निकासी एवं व्यय की भी स्वीकृति दी गई। इसके अलावा, कैबिनेट ने बिहार खेल नीति-2026, बिहार सहकारिता नीति-2026, राज्य में ई-कैबिनेट प्रणाली लागू करने, बिहार निबंधन (संशोधन) नियमावली-2026, लघु जल संसाधन विभाग में हाइड्रोलॉजिस्ट, हाइड्रो जियोलॉजिस्ट एवं जियोफिजिसिस्ट संवर्ग की भर्ती एवं सेवा शर्तों, विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के संस्थानों के लिए उपकरणों की खरीद, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कार्यालय के लिए भूमि हस्तांतरण तथा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण एवं भ्रष्टाचार निवारण मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष न्यायालयों में नए पदों के सृजन सहित विभिन्न विभागों के कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी प्रदान की।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

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