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बिहार : बांकीपुर उपचुनाव में नितिन के भरोसे भाजपा के गढ़ बचाने की कवायद

बिहार : बांकीपुर उपचुनाव में नितिन के भरोसे भाजपा के गढ़ बचाने की कवायद
बिहार : बांकीपुर उपचुनाव में नितिन के भरोसे भाजपा के गढ़ बचाने की कवायद

पटना, 25 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय पटना दौरे को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। बांकीपुर उपचुनाव की घोषणा के बाद यह उनका तीसरा पटना दौरा है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा अपनी पारंपरिक सीट को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है और चुनावी रणनीति में नितिन नवीन की सक्रिय भूमिका पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

नितिन नवीन शनिवार को पटना पहुंचे, जहां प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान वह पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा हाल के छात्र आंदोलन और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, पार्टी की ओर से उनके दौरे को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार के 100 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बांकीपुर में 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले नितिन नवीन चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। माना जा रहा है कि वह मतदान के दिन भी पटना पहुंच सकते हैं। इससे पहले भी वे इस महीने दो बार पटना आकर बांकीपुर उपचुनाव को लेकर रणनीतिक बैठकों में शामिल हुए थे। बांकीपुर विधानसभा सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस सीट का प्रतिनिधित्व पहले नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर ने किया और उनके निधन के बाद नितिन नवीन लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके राज्यसभा जाने से यह सीट खाली हुई, जिसके बाद उपचुनाव की नौबत आई। भाजपा ने शुरुआत में अभिषेक बंटी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनके परिवार का नाम चारा घोटाले से जुड़े मामलों में सामने आने के बाद नामांकन दाखिल होने के बावजूद पार्टी ने उम्मीदवार बदल दिया। इसके बाद बूथ स्तर से संगठन में सक्रिय रहे नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा गया। उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा के सामने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और राजद की प्रत्याशी रेखा गुप्ता की चुनौती है।

विपक्ष नीरज सिन्हा को अपेक्षाकृत कमजोर उम्मीदवार बताकर चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा संगठन और नेतृत्व के दम पर अपनी परंपरागत बढ़त बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रही है। चुनावी आंकड़े भी भाजपा के पक्ष में दिखाई देते हैं। बांकीपुर सीट पर 1995 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। 1995, 2000 तथा 2005 के दोनों विधानसभा चुनावों में नवीन किशोर ने जीत दर्ज की थी। उनके निधन के बाद 2006 के उपचुनाव से नितिन नवीन इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे और लगातार पांच बार विधायक चुने गए।

2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने 50 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उन्हें 98,299 वोट मिले थे, जबकि राजद की रेखा गुप्ता को 46,363 और जन सुराज की वंदना कुमारी को 7,717 वोट मिले थे। बांकीपुर पार्टी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता है। अब जबकि नितिन नवीन स्वयं चुनावी मैदान में नहीं हैं, भाजपा के सामने इस परंपरागत सीट को बचाए रखने की चुनौती है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के लगातार पटना दौरे और बांकीपुर पर विशेष फोकस को पार्टी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि भाजपा अपने इस मजबूत गढ़ को बरकरार रख पाती है या विपक्ष उसे कड़ी टक्कर देने में सफल होता है।

--आईएएनएस

एमएनपी/एएस

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