दिल्ली में बड़ा वोटर लिस्ट अपडेट: 33 लाख लोगों को नोटिस थमाए गए! जानिए घर बैठे अपना वोट कटने से कैसे बचाएं
दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के दौरान 33.13 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इन वोटरों के रिकॉर्ड में या तो पिछली SIR सूची से मैपिंग नहीं हो पाई या फिर उनके विवरण में कुछ विसंगतियां पाई गईं।
22 सितंबर 2026 को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कोर्ट ने बड़ी संख्या में जारी किए गए नोटिस को लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा और यह जानना चाहा कि 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के आधार पर नोटिस जारी करने का आधार क्या है।
आखिर दिल्ली में SIR क्यों हो रहा है?
दिल्ली में SIR की प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू हुई थी। उस समय दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। इसके बाद बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म से जुड़ी जानकारी जुटाई।
31 अगस्त को SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई। इसमें 97,53,577 मतदाताओं के नाम शामिल थे, जबकि 30 जून की सूची में 1,45,10,299 मतदाता थे। यानी करीब 47.56 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हुए।
इनमें ऐसे नाम शामिल बताए गए जिन्हें चुनाव अधिकारियों ने घर-घर सत्यापन के दौरान Absent, Shifted, Dead या Duplicate (ASDD) श्रेणियों में रखा।
33 लाख लोगों को नोटिस क्यों मिला?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 33.13 लाख नोटिस पाने वाले लोग 47.56 लाख बाहर किए गए नामों से अलग श्रेणी में हैं। इन 33.13 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में मौजूद हैं, लेकिन उनके रिकॉर्ड को लेकर अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत बताई गई है।
इनमें दो प्रमुख श्रेणियां हैं:
1. नो मैपिंग
करीब 13.79 लाख मतदाताओं का मौजूदा रिकॉर्ड पिछली SIR सूची से मैप नहीं हो पाया। इसे 'No Mapping' श्रेणी में रखा गया है।
2. लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी
करीब 19.33 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में 'Logical Discrepancy' बताई गई है। इसमें नाम, उम्र या परिवार से जुड़ी जानकारी में असंगति जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।
इस श्रेणी में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कई अन्य प्रमुख लोगों के नाम भी सामने आए हैं। रेखा गुप्ता से जुड़ी विसंगति बाद में सत्यापन के बाद क्लियर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने SIR के तहत जारी किए गए नोटिस की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से नोटिस पाने वाले लोगों के नाम और नोटिस जारी करने के कारणों को लेकर अधिक पारदर्शिता की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बड़ी संख्या में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' की श्रेणी को लेकर सवाल उठाए। चुनाव आयोग को इस वर्गीकरण और नोटिस जारी करने के आधार को स्पष्ट करना है।
अगर आपको SIR का नोटिस मिला है तो क्या करें?
अगर आपका नाम 33 लाख से ज्यादा नोटिस पाने वाले मतदाताओं में है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नोटिस का मतलब यह नहीं है कि आपका वोटर नाम तुरंत काट दिया गया है। यह सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया का हिस्सा है।
आपको नोटिस में दिए गए कारण को ध्यान से देखना चाहिए और जरूरत के मुताबिक संबंधित दस्तावेज जमा करने चाहिए।
ऑनलाइन या संबंधित चुनाव कार्यालय के माध्यम से जवाब और दस्तावेज दिए जा सकते हैं। ऑफलाइन प्रक्रिया के लिए अपने क्षेत्र के BLO या संबंधित चुनाव अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।
30 सितंबर और 29 अक्टूबर की तारीख क्यों महत्वपूर्ण है?
SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां 30 सितंबर 2026 तक दाखिल की जा सकती हैं। इसके बाद नोटिस और आपत्तियों से जुड़े मामलों का निपटारा 29 अक्टूबर तक किया जाना है।
इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने की प्रक्रिया तय है।
कचरा उठाने वाली गाड़ियों से क्यों किया जा रहा प्रचार?
SIR को लेकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली की कचरा संग्रह करने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल भी लोगों को SIR से जुड़ी जानकारी देने के लिए किया जाएगा।
इसके अलावा अखबारों, रेडियो और अन्य माध्यमों से भी मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड की जांच करने और जरूरत पड़ने पर दावा या आपत्ति दाखिल करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
सबसे जरूरी बात
SIR के दौरान नोटिस मिलना अपने आप में वोटर लिस्ट से नाम हटने का अंतिम फैसला नहीं है। जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का मौका दिया जा रहा है।
फिलहाल इस पूरी प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भी सुनवाई चल रही है और चुनाव आयोग से नोटिस जारी करने के आधार को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ऐसे में दिल्ली के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने नाम और रिकॉर्ड की स्थिति जांचें और अगर कोई नोटिस मिला है तो तय समय सीमा के भीतर उसका जवाब दें।

