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अनिल अंबानी की कंपनी से जुड़े ₹40,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी राहत, पूर्व अधिकारी पुनीत गर्ग को मिली जमानत

अनिल अंबानी की कंपनी से जुड़े ₹40,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी राहत, पूर्व अधिकारी पुनीत गर्ग को मिली जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े करीब 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कंपनी के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी पुनीत नरेंद्र गर्ग को जमानत दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले की जांच कर रहा है। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी और उसकी समूह इकाइयों ने बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लिया और कथित तौर पर इस रकम के एक बड़े हिस्से को विदेशी सहायक कंपनियों तथा ऑफशोर संस्थाओं के जरिए ट्रांसफर किया गया।

पहले कई बार खारिज हो चुकी थी जमानत याचिका

पुनीत गर्ग को इससे पहले जमानत के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने जून 2026 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले अप्रैल में उन्होंने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की थी, ताकि निजी अस्पताल में जरूरी मेडिकल जांच और इलाज करा सकें। उनकी गिरफ्तारी से पहले मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भी इलाज हुआ था।अब दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस मामले में उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

कौन हैं पुनीत नरेंद्र गर्ग?

पुनीत नरेंद्र गर्ग रिलायंस कम्युनिकेशंस में लंबे समय तक कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। वे ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के अध्यक्ष, नियामक मामलों के अध्यक्ष, कार्यकारी निदेशक और बाद में गैर-कार्यकारी निदेशक जैसे पदों पर रहे।ED का आरोप है कि कंपनी में इन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के दौरान उनकी कथित तौर पर संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में भूमिका थी। एजेंसी ने जनवरी 2026 में उन्हें गिरफ्तार किया था। जून 2026 में ट्रायल कोर्ट ने मामले में दाखिल चार्जशीट स्वीकार की थी और उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

क्या है ₹40,185 करोड़ का पूरा मामला?

यह मामला अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे जुड़ी कंपनियों पर बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज के कथित दुरुपयोग तथा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले में कुल बकाया राशि करीब 40,185 करोड़ रुपये बताई गई है।प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि कथित तौर पर अवैध तरीके से इस्तेमाल किए गए फंड के जरिए अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैनहट्टन में लग्जरी अपार्टमेंट और एक आलीशान यॉट खरीदी गई। जांच एजेंसी इन संपत्तियों और संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

दिवालिया प्रक्रिया के दौरान भी लेन-देन पर सवाल

जांच एजेंसी के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस की दिवालिया समाधान प्रक्रिया (CIRP) के दौरान मैनहट्टन स्थित अपार्टमेंट को बेच दिया गया था। ED का आरोप है कि इस बिक्री से प्राप्त करीब 8.3 मिलियन डॉलर की रकम दुबई स्थित एक कंपनी में ट्रांसफर कर दी गई।एजेंसी का दावा है कि यह लेन-देन रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की अनुमति के बिना किया गया था। अब जांच का मुख्य हिस्सा कथित फंड ट्रांसफर, विदेशी संपत्तियों की खरीद और बैंक ऋण के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित है।

फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट से पुनीत गर्ग को मिली जमानत इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक अहम घटनाक्रम है। हालांकि, पूरे मामले में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। ED के आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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