Samachar Nama
×

डायबिटीज मरीजों के लिए बड़ी राहत: भारत में लॉन्च हुआ हफ्ते में एक बार लगने वाला इंसुलिन, वीडियो में जाने सालभर में सिर्फ 52 इंजेक्शन

डायबिटीज मरीजों के लिए बड़ी राहत: भारत में लॉन्च हुआ हफ्ते में एक बार लगने वाला इंसुलिन, वीडियो में जाने सालभर में सिर्फ 52 इंजेक्शन

डायबिटीज से जूझ रहे करोड़ों मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) ने भारत में अपना नया बेसल इंसुलिन Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह भारत का ऐसा बेसल इंसुलिन है, जिसे सप्ताह में केवल एक बार लेने की जरूरत होगी। यह दवा टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गई है।

इस नई थेरेपी के आने से रोजाना इंसुलिन लेने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। जहां अब तक मरीजों को साल में लगभग 365 इंजेक्शन लगाने पड़ते थे, वहीं Awiqli के इस्तेमाल से यह संख्या घटकर सिर्फ 52 इंजेक्शन रह जाएगी।

रोज इंजेक्शन के डर से इलाज में होती है देरी

नोवो नॉर्डिस्क के अनुसार, कई मरीज रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लगाने के डर या असुविधा के कारण समय पर इंसुलिन थेरेपी शुरू नहीं कर पाते। कंपनी का कहना है कि इसी वजह से मरीजों में इंसुलिन उपचार शुरू करने में औसतन 7 से 9 वर्ष तक की देरी हो जाती है।कंपनी का मानना है कि सप्ताह में केवल एक बार लगने वाला इंसुलिन इस मानसिक और व्यावहारिक बाधा को कम करेगा तथा मरीजों के लिए उपचार को अधिक सुविधाजनक बनाएगा।

कीमत भी बताई गई किफायती

नोवो नॉर्डिस्क ने Awiqli का 700 यूनिट पैक 2,611 रुपये में लॉन्च किया है। इस हिसाब से इसकी कीमत लगभग 3.73 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है।कंपनी का दावा है कि यह मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक किफायती है। यदि किसी मरीज को प्रतिदिन 10 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होती है, तो उसे सप्ताह में 70 यूनिट इंसुलिन की जरूरत होगी, जिसकी अनुमानित लागत करीब 261 रुपये प्रति सप्ताह पड़ेगी।

टाइप-1 और टाइप-2 दोनों मरीजों के लिए

यह नया बेसल इंसुलिन टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, किसी भी मरीज को इस दवा का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह और निर्धारित उपचार योजना के अनुसार ही करना चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि इंसुलिन की खुराक, समय और उपचार की अवधि प्रत्येक मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा में बदलाव करना उचित नहीं है।

इलाज को आसान बनाने की दिशा में अहम कदम

भारत दुनिया में डायबिटीज से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। ऐसे में सप्ताह में एक बार दिए जाने वाले इंसुलिन का विकल्प मरीजों की जीवनशैली को आसान बनाने और उपचार का पालन (Treatment Adherence) बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह थेरेपी व्यापक स्तर पर अपनाई जाती है, तो इससे मरीजों के लिए इंसुलिन उपचार अधिक सुविधाजनक हो सकता है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता और उपयुक्तता का अंतिम निर्णय मरीज की चिकित्सा स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही किया जाएगा।

Share this story

Tags