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टीएमसी में बड़ा राजनीतिक भूचाल: 20 सांसदों ने किया दल बदल, वीडियो में देंखे नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में विलय का दावा

टीएमसी में बड़ा राजनीतिक भूचाल: 20 सांसदों ने किया दल बदल, वीडियो में देंखे नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में विलय का दावा

देश की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने कथित तौर पर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और विपक्षी खेमे में नई बहस छेड़ दी है।जानकारी के मुताबिक, सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार शाम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपने के बाद इस विलय की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने बयान में कहा कि अब उनका गुट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर काम करेगा। इस घोषणा के बाद राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

इसी बीच, पार्टी के भीतर मतभेद और गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई है। बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय ने दावा किया है कि उनका समूह पहले ही NCPI में शामिल हो चुका है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें लगभग 17 टीएमसी सांसद मौजूद दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और कई तरह की राजनीतिक अटकलों को जन्म दे रही है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी के भीतर से तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। पार्टी की वरिष्ठ नेता महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सुदीप बंद्योपाध्याय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि 2017 में रोज वैली मामले में गिरफ्तारी के समय भी उन्होंने बीमारी का बहाना बनाया था और अब एक बार फिर उसी तरह के बहाने बनाकर दिल्ली जाकर “गद्दारी” की गई है।

महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं, जैसे तापस रॉय और कुणाल घोष, ने पहले ही सुदीप बंद्योपाध्याय को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उस समय उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। अब परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी के भीतर आंतरिक विवाद और गहरा होता दिखाई दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। टीएमसी की आंतरिक एकता और नेतृत्व पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर न तो टीएमसी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान आया है और न ही केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया दी गई है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस “बड़े राजनीतिक पलायन” को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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