भारत मंडपम से आई बड़ी खबर: PM Modi ने खत्म कराया ईरान-सऊदी और UAE का गतिरोध, साझा घोषणापत्र पर बनी बात
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच पश्चिम एशिया के तनाव ने भी पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच BRICS के मंच पर ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश एक साथ मौजूद हैं। ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती अलग-अलग देशों के मतभेदों के बीच साझा सहमति बनाने की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। बातचीत में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बनाने पर जोर दिया। भारत ने क्षेत्र में आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता, समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के महत्व को भी रेखांकित किया।
BRICS घोषणापत्र बना बड़ी चुनौती
इस BRICS सम्मेलन में साझा घोषणापत्र को लेकर भी काफी चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार BRICS के वरिष्ठ वार्ताकार सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मुद्दे पर अलग-अलग देशों के रुख के कारण घोषणापत्र की भाषा को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं।
यही वजह है कि भारत की मेजबानी में हो रहे इस सम्मेलन को केवल आर्थिक या व्यापारिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान से भारत का सीधा संवाद
प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात इस पूरे घटनाक्रम में खास महत्व रखती है। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से बातचीत और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय संघर्षों का समाधान निकालने पर जोर दिया।
भारत के लिए पश्चिम एशिया बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र से भारत के व्यापारिक संबंध, ऊर्जा आपूर्ति और बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों के हित जुड़े हुए हैं। इसलिए क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाला तनाव भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है।
एक मंच पर ईरान, सऊदी और UAE
BRICS के मौजूदा विस्तार के बाद ईरान, सऊदी अरब और UAE तीनों इस समूह के पूर्ण सदस्य हैं। ऐसे में भारत मंडपम में इन देशों की मौजूदगी अपने आप में महत्वपूर्ण है। सम्मेलन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
भारत की कोशिश फिलहाल यही दिखाई दे रही है कि BRICS के मंच को बातचीत और सहयोग के लिए इस्तेमाल किया जाए। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान-सऊदी-UAE के बीच पूरा गतिरोध खत्म करा दिया है या साझा घोषणापत्र पर अंतिम सहमति हो चुकी है।
दुनिया की नजर भारत मंडपम पर
12 और 13 सितंबर को दिल्ली में हो रहा BRICS शिखर सम्मेलन इस समय वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। रूस, चीन, ईरान, सऊदी अरब और UAE समेत BRICS के 11 पूर्ण सदस्य देशों के नेता इसमें शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी कर रहे हैं।
ऐसे में आने वाले घंटों में साझा घोषणापत्र पर क्या सहमति बनती है और पश्चिम एशिया के तनाव को लेकर BRICS किस तरह का रुख सामने रखता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

