किसानों के लिए बड़ा फैसला: 6 रबी फसलों का MSP बढ़ा, गेहूं में ₹25 की बढ़ोतरी; ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को भी मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को रबी सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। सरकार के फैसले के मुताबिक गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।
कुसुम, सरसों और मसूर के MSP में बड़ी बढ़ोतरी
रबी की छह फसलों के MSP में अलग-अलग दर से बढ़ोतरी की गई है। कुसुम के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। इसके बाद सरसों-राई के MSP में 413 रुपये और मसूर में 390 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई।
गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। सरकार हर साल प्रमुख फसलों का MSP तय करती है, ताकि किसानों को उनकी उपज के लिए निर्धारित न्यूनतम मूल्य मिल सके। MSP में बढ़ोतरी का उद्देश्य उत्पादन लागत और किसानों की आय से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फसलों के लिए समर्थन मूल्य तय करना है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को भी मंजूरी
कैबिनेट ने इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 GW तक की रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने के लिए इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित किया जाएगा।
सरकार ने इस परियोजना को 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य देश में सौर और पवन ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली को ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ाना है।
रात में भी इस्तेमाल होगी दिन में बनी बिजली
सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इससे बिजली मुख्य रूप से दिन के समय पैदा होती है, जबकि मांग रात में भी बनी रहती है। इसी तरह हवा की गति कम होने पर विंड पावर का उत्पादन घट सकता है।
इस समस्या से निपटने के लिए ऊर्जा भंडारण व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। बड़े स्तर पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाए जाने की योजना है, जिसमें दिन के समय अतिरिक्त बिजली को स्टोर किया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर रात में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के जरिए रिन्यूएबल ऊर्जा उत्पादन वाले क्षेत्रों से बिजली को उन इलाकों तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, जहां इसकी मांग अधिक है। इससे देश के बिजली ग्रिड में सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कैबिनेट के दोनों फैसले कृषि और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हैं। एक तरफ रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी उपज के लिए संशोधित समर्थन मूल्य मिलेगा, वहीं ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III के जरिए देश में अक्षय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने और उसके भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर काम किया जाएगा।

