'बिग ब्रिक्स सहयोग' से ग्लोबल साउथ को नए अवसर
बीजिंग, 11 सितंबर (आईएएनएस)। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 से 13 सितंबर तक भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष ब्रिक्स सहयोग तंत्र की 20वीं वर्षगांठ भी है। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने अपनी सदस्यता का लगातार विस्तार किया है और सहयोग के क्षेत्रों को भी व्यापक बनाया है। इससे ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग और विकास के नए अवसर खुले हैं।
ब्रिक्स सहयोग की शुरुआत 2006 में हुई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। इसके बाद 2011 में दक्षिण अफ्रीका आधिकारिक तौर पर समूह में शामिल हुआ। अगस्त 2023 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 15वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां ब्रिक्स की सदस्यता बढ़ाने का फैसला लिया गया। इसके बाद 1 जनवरी 2024 को सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और इथियोपिया ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बने।
इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बन गया। वहीं, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, युगांडा और नाइजीरिया ब्रिक्स के भागीदार देश बन गए।
विस्तार के बाद ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती है। ये देश दुनिया के कुल आर्थिक उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में करीब पांचवां हिस्सा रखते हैं।
इसी विस्तार के बाद 2024 में आयोजित पहले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एक महत्वपूर्ण भाषण दिया। उन्होंने 'बिग ब्रिक्स सहयोग' के उच्च-गुणवत्तापूर्ण विकास को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने जोर दिया कि ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ में एकता और सहयोग को बढ़ावा देने वाला प्रमुख माध्यम और वैश्विक शासन में सुधार को आगे बढ़ाने वाली अग्रणी शक्ति बनना चाहिए। साथ ही, उन्होंने सभी पक्षों से 'शांति ब्रिक्स', 'नवाचार ब्रिक्स', 'हरित ब्रिक्स', 'न्यायपूर्ण ब्रिक्स' और 'जन-से-जन ब्रिक्स' के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। इसके लिए उन्होंने कई ठोस उपायों की घोषणा भी की, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में अन्य ब्रिक्स सदस्यों के साथ चीन का आयात और निर्यात 74.7 खरब युआन तक पहुंच गया, जो उस वर्ष चीन के कुल विदेशी व्यापार का 16.4 प्रतिशत था।
इस बीच, भारत, चीन, इंडोनेशिया और अन्य ब्रिक्स देश अपने-अपने आधुनिकीकरण लक्ष्यों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के पूर्व अध्यक्ष सुधींद्र कुलकर्णी का मानना है कि ब्रिक्स देशों के पास संसाधनों का लाभ और कई क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक क्षमताएं हैं। उनके अनुसार, ये क्षमताएं साझा विकास हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती हैं।
वहीं, इंडोनेशिया के एक स्वतंत्र थिंक टैंक की विशेषज्ञ विर्दिका रिजकी उतामा का मानना है कि 'बिग ब्रिक्स सहयोग' विकासशील देशों को जोखिम कम करने और जटिल समस्याओं के लिए विविध समाधान तलाशने में मदद कर सकता है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधित्व और आवाज को मजबूत करने, विकास की नींव को और मजबूत बनाने तथा विकास की गति को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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