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सत्य निकेतन हादसे में बड़ा एक्शन, MCD के 5 अधिकारी सस्पेंड; हाईकोर्ट ने भी मांगा जवाब

सत्य निकेतन हादसे में बड़ा एक्शन, MCD के 5 अधिकारी सस्पेंड; हाईकोर्ट ने भी मांगा जवाब

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG की इमारत ढहने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (SE) रणवीर सिंह और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) ललित कुमार गोयल समेत पांच अधिकारी शामिल हैं।

हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद इमारतों की सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इसी मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर भी सुनवाई शुरू हो गई है।

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस दिया

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के सामने दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राजधानी में समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है।

वकील ने दलील दी कि कभी आग लगने, कभी जलभराव और कभी इमारत गिरने जैसी घटनाओं का सामना छात्रों को करना पड़ता है। ऐसे मामलों में दिल्ली नगर निगम समेत संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।

मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय, MCD, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।

'प्रशासन को ज्यादा गंभीर और प्रभावी रुख अपनाना होगा'

अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसे मामलों में ज्यादा गहन और अर्थपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

हाईकोर्ट के सामने यह बात भी रखी गई कि ढही हुई इमारत में दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रह रहे थे। अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में बाहर से आने वाले सभी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराए के मकानों में रहने को मजबूर होते हैं।

हादसे के बाद MCD के पांच अधिकारियों पर कार्रवाई

सत्य निकेतन हादसे को लेकर MCD ने अपने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। अधिकारियों की भूमिका और इमारत की निगरानी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इमारत की स्थिति को लेकर संबंधित विभागों को पहले से कोई जानकारी थी और यदि थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

छात्रों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

सत्य निकेतन इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास रहने वाले छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है। बड़ी संख्या में छात्र यहां PG और किराए के मकानों में रहते हैं। हादसे के बाद ऐसे भवनों की सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब हाईकोर्ट की सुनवाई में यह तय होना अहम होगा कि छात्रों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने और जर्जर या असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों की क्या जिम्मेदारी है।

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