भूटान में ‘स्टडी इन इंडिया’, नालंदा विश्वविद्यालय ने मजबूत किए ऐतिहासिक संबंध
राजगीर, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय ने इस सप्ताह भूटान के थिम्पू में आयोजित 'स्टडी इन इंडिया' कार्यक्रम में भागीदारी की। यहां विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने संभावित छात्रों और शोधार्थियों से मुलाकात की। इस कार्यक्रम के जरिये नालंदा विश्वविद्यालय ने यह भी दिखाया कि वह किस तरह एशिया की महान ज्ञान परंपराओं को आज की आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर आगे बढ़ रही है।
नालंदा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बुधवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नालंदा विश्वविद्यालय के डेलीगेशन में शामिल डॉ. किशोर धवाला और डॉ. प्रांशु समदर्शी ने एम्बेसडर संदीप आर्य से भी मुलाकात की।
इस बातचीत में भारत और भूटान के पुराने सांस्कृतिक और विद्वत परंपरा के संबंधों को और सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। साथ ही, टीम ने रॉयल सिविल सर्विस कमीशन की चेयरपर्सन ताशी पेम से भी मुलाकात की और उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते आपसी सहयोग की जानकारी दी। इस कार्यक्रम के जरिये विश्वविद्यालय को भूटान के साथ अपने पुराने ऐतिहासिक संबंधों को याद करने का अवसर मिला, जो खासकर गुरु पद्मसंभव जैसे महान बौद्ध गुरुओं से जुड़े हैं।
नालंदा विश्वविद्यालय ने 11वें भूटान इंटरनेशनल एजुकेशन फेयर में भी हिस्सा लिया। बताया गया कि यहां विश्वविद्यालय के स्टॉल पर काफी छात्र आए, जिन्हें वहां पढ़ाई के मौकों और 'नालंदा यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप स्कीम' के बारे में बताया गया। पुरानी विरासत और आज के नए कोर्सेज के अनूठे मेल की वजह से नालंदा का यह पवेलियन छात्रों के बीच काफी पॉपुलर रहा।
शिक्षा और कौशल विकास मंत्री येज़ांग दे थापा ने विश्वविद्यालय के स्टॉल (पवेलियन) का दौरा किया। उन्होंने नालंदा की टीम से बात की और विश्वविद्यालय के उस खास नजरिए को सराहा, जो अपनी पुरानी विरासत को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ता है।
विश्वविद्यालय ने दावा किया कि नालंदा विश्वविद्यालय भारत और भूटान के बीच एक मजबूत कड़ी का काम कर रहा है। इससे न केवल दोनों देशों में शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि हमारी साझा संस्कृति और ज्ञान की परंपरा भी और मजबूत हो रही है।
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