भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे सरकारी कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई जरूरी : मद्रास हाईकोर्ट
मदुरै, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने कहा है कि किसी सेवारत सरकारी कर्मचारी का आपराधिक मामले, खासकर भ्रष्टाचार के मामले में शामिल होना गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने पर कोई रोक नहीं है।
न्यायमूर्ति पुगाझेंधी ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद निलंबित किए गए पांच सरकारी कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इन कर्मचारियों में सुनीथा, अखिलिन मेबल, इत्तुराज, गणेसामूर्ति और रविचंद्रन शामिल हैं। इन्हें सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) पुलिस की छापेमारी के दौरान कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने अपने निलंबन आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए मदुरै पीठ का रुख किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पुगाझेंधी ने कहा कि इन मामलों में आपराधिक मामलों, विशेषकर रिश्वत के मामलों में शामिल सरकारी कर्मचारियों को सेवा में बने रहने दिया गया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को कई वर्षों से बिना कोई काम किए निर्वाह भत्ता मिल रहा है, जबकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू नहीं की गई।
अदालत ने कहा, “किसी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होना उसके कदाचार के लिए विभागीय कार्यवाही शुरू करने में बाधा नहीं है। सरकारी सेवा में आचरण नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना प्रशासन की ईमानदारी बनाए रखने के लिए अधिकारियों का दायित्व है।”
पीठ ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों का सरकारी सेवा में प्रवेश प्रशासन की निष्पक्षता और अखंडता को प्रभावित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों की सुनवाई लंबित रहने के दौरान भी विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
अदालत ने कहा, “किसी सेवारत सरकारी कर्मचारी का आपराधिक मामले, विशेषकर भ्रष्टाचार के मामले में शामिल होना हल्के में नहीं लिया जा सकता।”
मदुरै पीठ ने कहा कि मौजूदा सरकार ने भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने और भ्रष्टाचार मुक्त समाज बनाने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है। ऐसे में आचरण नियमों का उल्लंघन कर भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत संदेश जाएगा और अन्य अधिकारियों के बीच भी निवारक प्रभाव पैदा होगा।
अदालत ने सरकार को सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों में आवश्यक संशोधन करने की सिफारिश की, ताकि ऐसे मामलों का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ विभागीय कार्यवाही छह महीने के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो विभागीय कार्यवाही शुरू करने और उसे संचालित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश देना आवश्यक हो सकता है।
इन निर्देशों के साथ न्यायमूर्ति पुगाझेंधी ने संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
--आईएएनएस
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