भोजशाला परिसर स्थित वाग्देवी मंदिर में सनातनियों ने उत्साह के साथ की पूजा, जताया शासन-प्रशासन का आभार
धार, 22 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानने और हिंदू समुदाय को विशेष पूजा का अधिकार देने वाले हाई कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार नमाज अदा नहीं हुई। इस दौरान पूजा-अर्चना करने आए सनातनी श्रद्धालुओं ने हिंदुओं की जीत और शासन-प्रशासन का आभार जताया।
गोसेवक और श्रद्धालु जीतू रघुवंशी ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि भारत देश के सभी नौजवानों को बहुत शुभकामनाएं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना की जा रही है। तनाव के बीच श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा के लिए आ रहे हैं। सनातनियों में उत्सव का माहौल है।
महिला श्रद्धालु प्रभावती ने कहा कि आज का दिन हमारे लिए ऐतिहासिक रहा है, हमें बहुत खुशी है। हिंदू समाज और सनातनियों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि साल 2003 में भोजशाला ताला तोड़ो आंदोलन में 15 दिन की गिरफ्तारी हुई थी। इस आंदोलन में हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल हुए थे।
एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि इस दिन के लिए हिंदू समाज ने बहुत संघर्ष किया है। हाईकोर्ट के फैसले से सत्य की जीत हुई है।
एक अन्य महिला श्रद्धालु ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि नमाज अभी नहीं और कभी नहीं। हिंदू पक्ष की जीत हुई है और पूजा के लिए सनातनी ही आते रहेंगे। कई साल के पश्चात हिंदू समाज को पूजा करने का अधिकार मिला है।
पुरुष श्रद्धालु ने कहा कि मां वाग्देवी का भव्य मंदिर बनना चाहिए, जिससे विश्वभर का हिंदू समाज यहां पूजा करने के लिए आए। आज हिंदू समाज की बड़ी जीत हुई है। पहला अवसर है कि शुक्रवार के दिन हिंदू समाज के सनातनी मां सरस्वती के दर्शन और पूजन कर रहे हैं।
दरअसल, भोजशाला विवाद लंबे समय से मध्य भारत के सबसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल 1034 ईस्वी में राजा भोज द्वारा मां सरस्वती के मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित किया गया था, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां सदियों से कमाल मौला मस्जिद मौजूद है और पूर्व प्रशासनिक व्यवस्थाओं के जरिए इस स्थल की कानूनी स्थिति पहले ही तय की जा चुकी है।
--आईएएनएस
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