भोजशाला पर न्यायालय के फैसले पर माकपा ने उठाए सवाल
भोपाल, 16 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने धार जिले में स्थित भोजशाला को मंदिर का स्वरूप माना है और पूजा अर्चना की अनुमति दी है। न्यायालय के इस फैसले पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सवाल उठाए हैं।
माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान जारी कर कहा है कि उपासना स्थल अधिनियम 1991 ज़ब संसद में पारित किया गया था, तो उसमें यह स्पष्ट किया गया था कि किसी भी उपासना स्थल का स्वरुप जो 15 अगस्त 1947 को था, उसे बरकरार रखा जाएगा। भोजशाला विवाद को लेकर शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्णय से साफ है कि उसने महत्वपूर्ण निर्देशों की अनदेखी की गई है l
यह निर्णय एकता और अखंडता तथा सदभावना पर विपरीत असर डालेगा l मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की मध्यप्रदेश राज्य समिति मानती है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है, ज़ब देश आर्थिक संकट और जनता महंगाई की मार से जूझ रही है l हमें इन बुनियादी मुद्दों पर एकजुट संघर्ष तेज करने होंगे l इस निर्णय से असंतुष्ट पक्षों को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है l आशा है, सर्वोच्च न्यायालय इस सम्बन्ध में तर्क संगत निर्णय देगा l
साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय तक मुस्लिम समुदाय को नमाज से वंचित नहीं किया जाना चाहिए l स्वयं सरकार को भी इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करनी चाहिए l मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रदेश की जनता से शांति और सदभाव बनाए रखने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान की निंदा की है और कहा है कि वे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और उनकी जिम्मेदारी विधिसम्मत शासन चलाने की है सांप्रदायिक उछल कूद की नहीं।
दरअसल, भोजशाला का मुद्दा लंबे अरसे से विवादों में है और इस मामले पर शुक्रवार को उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने फैसला सुनाया। जिसमें भोजशाला को मंदिर का स्वरूप माना गया है और पूजा अर्चना की अनुमति दी गई है साथ ही वहां अब नमाज नहीं हो सकेगी।
--आईएएनएस
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