भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले में वक्फ कानून को दरकिनार किया गया: वारिस पठान
मुंबई, 15 मई (आईएएनएस)। भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि सबसे पहले तो, मैं उस फैसले पर पूरी विनम्रता के साथ असहमति जताता हूं। उन्होंने कहा कि यह एक गलत और निराशाजनक फैसला है।
वारिस पठान ने कहा कि इस मामले में कई बातें बिना किसी चीज को ध्यान में रखे ही तय कर दी गईं। फैसले में वक्फ कानून को दरकिनार कर दिया गया। प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को भी नहीं माना गया। वहां पर नमाज हो रही थी। राम मंदिर के मामले में भी आस्था की बुनियाद पर फैसला दे दिया गया। अब यहां पर भी यही हो रहा है। हमें सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है।
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अब्दुल समद ने कहा कि मुस्लिम समुदाय हर हफ्ते भोजशाला में शुक्रवार की नमाज पढ़ता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। जो बातें हमारी यहां नहीं सुनी गई हैं, वो बातें हम सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे। जब से मस्जिद बनी है, हम तब से नमाज पढ़ रहे हैं। संवैधानिक अधिकार के तहत वहां नमाज पढ़ते आए हैं और पढ़ते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहे तो आदेश का पालन करवा सकता है, लेकिन प्रशासन ने 2003 के आदेश का पालन नहीं करवाया, क्योंकि 2003 के आदेश में लिखा है कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक मंगलवार को हिंदू समाज विजिटर के तौर पर घूम सकता है। पूजा का कोई भी लेख नहीं था, लेकिन फिर भी वहां अवैध तरीके से पूजा-पाठ और धार्मिक चीजों को अंजाम दिया जा रहा था।
काजी सैयद निसार अली ने भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि हाई कोर्ट का फैसला एक पक्ष के फेवर में गया है। उन्होंने कहा कि आगे सुप्रीम कोर्ट है। हिंदुस्तान के अदालतों पर हमें भरोसा है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। अगर कोई पक्ष इस फैसले को अपने फेवर में समझ रहा है तो यह अंतिम फैसला नहीं है। अभी सुप्रीम कोर्ट है।
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