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भोजशाला फैसले पर सियासी घमासान: भाजपा नेताओं ने बताया ऐतिहासिक, विपक्ष ने कहा-बढ़ सकता है विवाद

नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भाजपा नेता इसे ऐतिहासिक और धार्मिक न्याय से जोड़कर देख रहे हैं जबकि विपक्ष नेता इससे विवाद बढ़ने की बात कह रहे हैं।
भोजशाला फैसले पर सियासी घमासान: भाजपा नेताओं ने बताया ऐतिहासिक, विपक्ष ने कहा-बढ़ सकता है विवाद

नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भाजपा नेता इसे ऐतिहासिक और धार्मिक न्याय से जोड़कर देख रहे हैं जबकि विपक्ष नेता इससे विवाद बढ़ने की बात कह रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी के सांसद अतुल गर्ग ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में इस तरह के मामलों का अदालत तक जाना ही अपने आप में एक दुखद और अजीब स्थिति है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर ऐतिहासिक स्थलों पर अलग-अलग लोगों ने कब्जा करके उन्हें अपने धार्मिक केंद्रों के रूप में उपयोग किया है। उनके अनुसार, ऐसे स्थलों को उनके मूल स्वरूप में वापस लौटाया जाना चाहिए।

वहीं, भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि भोजशाला परिसर में पहले माता सरस्वती का मंदिर हुआ करता था और बाद में विदेशी आक्रमणों के दौरान कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया। उनके अनुसार अदालत के इस फैसले ने ऐतिहासिक सच्चाई को सामने लाने का काम किया है।

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "हम सभी बहुत प्रसन्न हैं और उच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत करते हैं। निश्चित रूप से इसने सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए एक अच्छा अवसर प्रदान किया है।"

वहीं, कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने इस मुद्दे पर अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि वे संविधान और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और अदालत के फैसले को स्वीकार करते हैं लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि लंबे समय से वहां मुस्लिम समुदाय के लोग धार्मिक गतिविधियां करते आ रहे थे। उनके अनुसार अब वहां नए बदलाव की बात हो रही है, तो सभी पक्षों को मिलकर समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उस स्थान को एक शिक्षा केंद्र या विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि वहां किसी भी प्रकार का विवाद खत्म हो सके और समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें। उनका कहना है कि अगर वहां विश्वविद्यालय बनाया जाए तो हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी समुदाय के लोग एक साथ पढ़ सकते हैं और इससे समाज में एकता बढ़ेगी।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने कहा, "यह पूरी तरह से गलत है। पहले ही यह फैसला हो चुका था कि यह जगह जैसी है, जहां भी और जिस भी रूप में मौजूद है, वैसी ही रहेगी। हर जगह इस तरह का टकराव पैदा करना गलत है। कई बौद्ध स्तूपों को ढहा दिया गया है और कई जैन मंदिरों को नष्ट कर दिया गया है। बौद्धों को यहां से हटा दिया गया था। आप उस बारे में क्या करेंगे? उसकी भी जांच करवाइए और उसे उन्हें वापस दिलवाइए।"

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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